-आप के अंदर हुई बगावत के बाद सियासी चर्चा तेज मुंबई (ईएमएस)। महाराष्ट्र की राजनीति में फिर हलचल तेज होती दिख रही है, और सवाल उठ रहे हैं कि क्या उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) का भी वहीं हाल होने वाला है, जैसा हाल हाल के समय में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के साथ हुआ है। आप में कई बड़े नेताओं, खासकर राज्यसभा सांसदों के अलग होने की खबरों के बाद अब वैसी ही अटकलें शिवसेना (यूबीटी) को लेकर लग रही हैं। दरअसल, करीब चार साल पहले एकनाथ शिंदे की बगावत के कारण शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी, जिससे उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद भी गंवाना पड़ा। अब फिर उनके गुट से असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। हाल ही में पार्टी के कुछ सांसदों की गतिविधियों ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। विशेष रूप से संजय जाधव की गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर सवाल खड़े कर दिए। वे न ‘मातोश्री’ में हुई महत्वपूर्ण बैठक में पहुंचे और न ही ‘सेना भवन’ में आयोजित बैठक में शामिल हुए। जाधव मराठवाड़ा क्षेत्र में पार्टी का कदवार चेहरा माने जाते हैं, इसके बाद उनकी अनुपस्थिति को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेता अंबादास दानवे ने जाधव की गैरमाजूदगी को पारिवारिक कारण बताकर स्थिति को सामान्य बताने की कोशिश की है। लेकिन यह उद्धव ठाकरे गुट के लिए अकेला मामला नहीं है। पिछले कुछ महीनों में शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के बीच असंतोष की खबरें आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कामकाज और नेतृत्व से संवाद की कमी को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। अरविंद सावंत और अनिल देसाई जैसे कुछ नेताओं को छोड़कर कई सांसद अन्य राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इस बीच, कुछ नेताओं की दूसरी पार्टियों के नेताओं से मुलाकातों ने भी शक को बढ़ाया है। जैसे नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय देशमुख ने केंद्रीय मंत्री के कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जबकि संजय जाधव की अमित शाह से मुलाकात की खबरें भी सामने आईं। हालांकि इन मुलाकातों को “शिष्टाचार” बताया गया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इन्हें संभावित रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल, कोई ठोस सबूत नहीं है कि शिवसेना (यूबीटी) में तुरंत कोई बड़ी टूट होने वाली है। लेकिन जिस तरह की गतिविधियां सामने आ रही हैं, उससे यह जरूर साफ है कि पार्टी के अंदर सब कुछ पूरी तरह स्थिर नहीं है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह केवल अटकलें हैं या वास्तव में महाराष्ट्र की राजनीति एक और बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। आशीष दुबे / 26 अप्रैल 2026