क्षेत्रीय
28-Apr-2026
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बिलासपुर (ईएमएस)। डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय में जनजातीय समाज, पर्यावरण एवं विकास: एक बहु-विषयक और अंतर्विषयक विश्लेषण विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने आदिवासियों की अस्मिता की रक्षा और उनसे सीखने पर जोर दिया। मुख्य अतिथि पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, बिलासपुर के कुलपति प्रोफेसर वी. के. सारस्वत ने कहा कि आदिवासियों की अस्मिता और अस्तित्व की रक्षा अनिवार्य है, तभी उनका सही विकास संभव है। उन्होंने प्रकृति के अत्यधिक दोहन पर चिंता जताते हुए कहा कि जनजातीय समाज आज भी प्रकृति के सबसे निकट है। डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रदीप घोष ने कहा कि हमें जनजातीय समाज को सिखाने के बजाय उनसे सीखने की आवश्यकता है, क्योंकि उनके गोत्र और जीवन प्रकृति से गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने ऐसे विषयों पर शोध को समाज के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। समापन सत्र में छत्तीसगढ़ शासन के अतिरिक्त सचिव प्रोफेसर रूपेंद्र कवि ने कहा कि विकास को केवल भौतिक नहीं, बल्कि जीवन के अनुभव के रूप में समझना आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि जनजातीय समाज की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली सतत विकास की आधारशिला है और नीतियां लोगों पर थोपने के बजाय, उनके साथ मिलकर बनाई जानी चाहिए। यह सेमिनार डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, आईसीएसएसआर एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। देशभर से आए विद्वानों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। लगभग 100 शोध-पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 50 से अधिक प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. महेश शुक्ला ने कुशलतापूर्वक किया। सामाजिक विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. काजल मोइत्रा ने स्वागत उद्बोधन दिया। कुलसचिव डॉ. अरविंद कुमार तिवारी सहित कई प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। - 28 अप्रैल 2026