होर्मुज में भारी तनाव के बीच ट्रंप का सख्त संदेश वॉशिंगटन(ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी तनाव एक बार फिर विस्फोटक स्थिति में पहुंच गया है। एक तरफ जहां कूटनीतिक गलियारों में शांति प्रस्तावों पर चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ समुद्र में जहाजों पर हमलों और नौसैनिक नाकेबंदी ने वैश्विक व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। ताजा घटनाक्रम में, रविवार को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक और मालवाहक जहाज पर हमला हुआ, जिससे क्षेत्र में युद्ध के बादल और गहरे हो गए हैं। ब्रिटिश सेना के यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के अनुसार, रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास कई छोटी नावों ने एक मालवाहक जहाज को निशाना बनाया। हालांकि इस हमले में चालक दल सुरक्षित है, लेकिन इसने 22 अप्रैल के बाद से बनी शांति को भंग कर दिया है। इसी बीच, ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल टैक्स वसूलने की शर्त रखी है और अमेरिका या इजरायल से जुड़े जहाजों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। दुनिया के 20 प्रतिशत तेल व्यापार की जीवनरेखा माने जाने वाले इस रास्ते पर ईरान की अड़ियल नीति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मचा दी है। युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को एक 14-सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव में 30 दिनों के भीतर सभी विवादों को सुलझाने का रोडमैप दिया गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया कि वे इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान ने पिछले 47 वर्षों में जो किया है, उसकी उसे अभी पर्याप्त कीमत चुकानी बाकी है। ट्रंप के इस बयान से साफ है कि अमेरिका फिलहाल किसी भी बड़ी रियायत के मूड में नहीं है। ईरान की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने के लिए अमेरिका ने 13 अप्रैल से ईरानी बंदरगाहों की सख्त नौसैनिक नाकेबंदी कर रखी है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इस घेराबंदी से ईरान का दम घुट रहा है और उसके तेल भंडार टैंक तेजी से भर रहे हैं, जिससे उसे जल्द ही अपने कुएं बंद करने पड़ सकते हैं। यूएस सेंट्रल कमांड ने अब तक 49 जहाजों को ईरान जाने से रोका है। दूसरी ओर, कूटनीतिक स्तर पर ओमान और पाकिस्तान मध्यस्थता की कोशिशों में जुटे हैं। ईरान के विदेश मंत्री और ओमान के बीच हालिया बातचीत इस बात का संकेत है कि युद्ध की धमकियों के बीच पर्दे के पीछे समाधान की तलाश भी जारी है। फिलहाल, मिडिल ईस्ट में सैन्य कार्रवाई, आर्थिक प्रतिबंध और कूटनीतिक वार्ताओं का एक ऐसा त्रिकोण बन गया है, जिसका नतीजा आने वाले कुछ दिनों में पूरी दुनिया को प्रभावित करेगा। वीरेंद्र/ईएमएस 05 मई 2026