राज्य
06-May-2026


इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस जयकुमार पिल्लई की एकलपीठ ने पिता की नौकरी पर दावा करने वाली बेटी की याचिका खारिज करते अनुकंपा नियुक्ति को लेकर दिए एक अहम फैसले में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई संपत्ति का अधिकार नहीं, बल्कि संकटग्रस्त परिवार को तात्कालिक राहत देने की योजना है। बता दें कि रमेशवान गोस्वामी जो कि रतलाम जिला अस्पताल में ड्राइवर के पद पर पदस्थ थे उनका निधन 22 जून 2020 को सेवा के दौरान हो गया था। उनके पुत्र रितेश वान ने दिसंबर 2021 में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। परन्तु इसके साथ ही इसी पद पर रितेश की बहन और रमेशवान की बेटी अनीता वान ने भी दावा प्रस्तुत कर दिया। दोनों के दावे सामने आने पर विभाग ने 23 जनवरी 2024 और 6 फरवरी 2024 को पत्र जारी कर सक्सेशन सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने को कहा। जिसके खिलाफ भाई-बहन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका सुनवाई दौरान रितेश की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उनका नाम पिता ने सेवा के दौरान नामिनी के तौर पर शामिल किया था। पूरा परिवार पिता की आय पर निर्भर था और उनकी बहन शादीशुदा होने के कारण अलग रहती है। वहीं उनकी बहन और नियुक्ति की दावेदार अनीता पहले हलफनामा देकर उन्हें नियुक्ति की सहमति दे चुकी है। जिस पर अनीता ने कोर्ट के समक्ष खुद को वैध वारिस बताते हुए सेवा लाभों में बराबरी का अधिकार जताते भाई द्वारा प्रस्तुत उसके नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट को फर्जी बताया। अनीता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के उस सिद्धांत का हवाला भी दिया, जिसमें नामिनी को संरक्षक कहा है मालिक नहीं। सुनवाई दौरान सरकार की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी कि दोनों के दावे होने के कारण सही वारिस तय करने के लिए सक्सेशन सर्टिफिकेट मांगा गया है। जिस पर कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति में सक्सेशन सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती है, यह नियुक्ति राहतकारी नीति है। विभाग द्वारा सक्सेशन सर्टिफिकेट मांगना मनमाना और कानून के विपरीत है। टिप्पणी के साथ अपने निर्णय में कहा कि 2014 में अनुकंपा नियुक्ति नीति बनी थी। कर्मचारी की मृत्यु 2020 में हुई थी, इसलिए उस समय की नीति ही लागू होगी। 2023 में नीति में हुआ बदलाव इस पर लागू नहीं होगा। 2014 की नीति में अनुकंपा नियुक्ति के लिए प्राथमिकता क्रम तय है। इसमें पति/पत्नी, फिर पुत्र या अविवाहित पुत्री, उसके बाद विधवा-तलाकशुदा पुत्री। कोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी निर्देश दिया कि नियुक्ति से पहले रितेश को हलफनामा देना होगा कि वे अपनी मां और अन्य आश्रितों का भरण-पोषण करेंगे। यदि वे ऐसा करने में असफल रहते हैं तो उनकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है। आनंद पुरोहित/ 06 मई 2026