राष्ट्रीय
06-May-2026
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:: प्रशासन का महाकुंभ ब्लूप्रिंट : एआई और हाईटेक कमांड सेंटर संभालेंगे मोर्चा, 37 किमी लंबे घाटों पर 30 करोड़ श्रद्धालु लगाएंगे आस्था की डुबकी :: भोपाल/इंदौर (ईएमएस)। उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ-2028 को लेकर प्रशासन ने अपनी सुरक्षा रणनीति में स्मार्ट विजन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में आयोजित उच्च स्तरीय समन्वय बैठक में यह स्पष्ट कर दिया गया कि इस महापर्व की सुरक्षा का ढांचा पूरी तरह आधुनिक तकनीक और प्रयागराज महाकुंभ-2025 के सफल डिजिटल मॉडल पर आधारित होगा। 30 करोड़ श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग का व्यापक जाल बिछाने जा रहा है। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर जोर देते हुए निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रवेश और निकास के मार्ग पूरी तरह अलग रखे जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम समय में प्लेटफार्म बदलने जैसी स्थितियों से हर हाल में बचा जाए क्योंकि इससे अव्यवस्था फैलने का डर रहता है। डीजीपी ने उज्जैन के साथ-साथ इंदौर, रतलाम, भोपाल, सीहोर और ओंकारेश्वर रोड जैसे स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और अपराध नियंत्रण के लिए इंटेलिजेंस तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए। :: एआई कैमरों से रियल-टाइम मॉनिटरिंग :: बैठक में उत्तर प्रदेश के डीजी रेल प्रकाश डी. ने प्रयागराज के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि आगामी सिंहस्थ में स्मार्ट सुरक्षा के तहत एआई-आधारित क्राउड मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। यह सिस्टम न केवल भीड़ की गणना करेगा, बल्कि भीड़ के घनत्व और व्यवहार का वैज्ञानिक विश्लेषण कर संभावित खतरों की पूर्व सूचना देगा। तकनीक के माध्यम से कलर कोडिंग और होल्डिंग एरिया प्रबंधन को इतना सटीक बनाया जाएगा कि किसी भी एक बिंदु पर दबाव बढ़ने से पहले ही भीड़ को सुरक्षित रास्तों पर डायवर्ट कर दिया जाएगा। इस स्मार्ट सुरक्षा ब्लूप्रिंट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर होगा, जो पुलिस, रेलवे, जीआरपी और प्रशासन के बीच एक साझा डिजिटल सेतु का काम करेगा। :: 3100 हेक्टेयर का मेला क्षेत्र; 37 किमी के होंगे स्नान घाट :: उज्जैन पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण में बताया कि 9 अप्रैल से 8 मई 2028 तक प्रस्तावित इस महापर्व में लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। शाही स्नान के दिनों में एक ही दिन में करीब 5 करोड़ लोग उज्जैन पहुंच सकते हैं। इस भारी जनसमूह के लिए मेला क्षेत्र को 3100 हेक्टेयर में विकसित किया जा रहा है और शिप्रा नदी के तट पर घाटों की लंबाई बढ़ाकर 37 किलोमीटर की जा रही है। वैज्ञानिक आकलन के आधार पर घाटों की क्षमता को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि निर्धारित समय में लाखों श्रद्धालु सुगमता से स्नान कर सकें। :: तीन गुना बढ़ेगी मेला स्पेशल ट्रेनों की क्षमता :: परिवहन व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए रेलवे ने एक व्यापक रणनीति तैयार की है। रतलाम मंडल रेल प्रबंधक अश्विनी कुमार के अनुसार वर्ष 2016 के सिंहस्थ की तुलना में इस बार तीन गुना अधिक विशेष ट्रेनें चलाने का लक्ष्य रखा गया है। कम दूरी के यात्रियों के लिए पेंडुलम मूवमेंट आधारित मेला ट्रेनें चलाई जाएंगी और ट्रेनों के संचालन में लचीलापन लाने के लिए डायनेमिक टाइम टेबल तैयार किया जाएगा। इसके अलावा स्टेशनों पर नए फुट ओवर ब्रिज, अतिरिक्त प्लेटफॉर्म और सैटेलाइट स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है ताकि मुख्य शहर पर यातायात का दबाव कम रहे। :: संकट की स्थिति में जीरो रिस्पॉन्स टाइम :: आरपीएफ महानिदेशक सोनाली मिश्रा ने विभिन्न रेलवे जोनों के बीच सुदृढ़ समन्वय और आंतरिक सुरक्षा के प्रति सतर्कता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि रेलवे नेटवर्क में एक स्थान की घटना का प्रभाव दूर तक पड़ता है, इसलिए त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और एनडीआरएफ के साथ निरंतर तालमेल आवश्यक है। बैठक के अंत में सभी अधिकारियों ने एकमत होकर संकल्प लिया कि तकनीक के प्रभावी उपयोग और बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय के माध्यम से सिंहस्थ-2028 को एक सुरक्षित और सफल वैश्विक समागम बनाया जाएगा। बैठक में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए.साईं मनोहर, राजाबाबू सिंह, राकेश गुप्ता और उज्जैन के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। प्रकाश/06 मई 2026