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07-May-2026


- निजी क्षेत्र में वैधानिक प्रावधान और वित्तपोषण मॉडल का प्रस्ताव नई दिल्ली (ईएमएस)। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने श्रम मंत्रालय से पितृत्व अवकाश नीतियों में चरणबद्ध सुधार लाने का आह्वान किया है। परिषद का कहना है कि वर्तमान में निजी क्षेत्र में ऐसे अवकाश के लिए कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है, जिससे देखभाल संबंधी जिम्मेदारियों में असंतुलन बना हुआ है। परिषद ने अपने शोधपत्र ‘रीइमैजिनिंग द केयर इकनॉमी’ में इस दिशा में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। परिषद ने सिफारिश की है कि पहले चरण में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए वैधानिक पितृत्व अवकाश का विस्तार किया जाए। दूसरे चरण में श्रम मंत्रालय लैंगिक समानता को ध्यान में रखते हुए अवकाश की अवधि पर पुनर्विचार करे और मातृत्व-पितृत्व अवकाश का अधिक संतुलित संयोजन अनिवार्य करे। वित्तपोषण के लिए, शोधपत्र में बाजार-आधारित साधनों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है, जैसे भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) जैसी एजेंसियां अंशदायी माता-पिता अवकाश बीमा उत्पाद शुरू करें। इस मॉडल में नियोक्ता और कर्मचारी सह-भुगतान करेंगे, और अवकाश के दौरान भुगतान प्राप्त करेंगे। सरकार कम आय वाले श्रमिकों के लिए अंशदान पर सब्सिडी भी दे सकती है। वर्तमान में केंद्र सरकार के पुरुष कर्मचारी 15 दिनों के पितृत्व अवकाश के हकदार हैं, लेकिन निजी क्षेत्र के लिए ऐसा कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है। सतीश मोरे/07मई ---