- विद्यालयी व्यावसायिक शिक्षा में एनीमेशन, गेमिंग एवं भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित सामग्री के समावेशन पर हुई चर्चा भोपाल (ईएमएस) । पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (पीएसएससीआईवीई), एनसीईआरटी, भोपाल में 7 मई 2026 को एवीजीसी (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग एवं कॉमिक्स) एवं रचनात्मक कौशल शिक्षा विषय पर विशेषज्ञ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (आईआईसीटी) के निदेशक आशीष कुलकर्णी ने संस्थान का भ्रमण किया तथा संस्थान के संकाय सदस्यों एवं तकनीकी विशेषज्ञों के साथ महत्वपूर्ण विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. दीपक पालीवाल, संयुक्त निदेशक, पीएसएससीआईवीई द्वारा कुलकर्णी का स्वागत एवं सम्मान किया गया। इस अवसर पर प्रो. विनय स्वरूप मेहरोत्रा, प्रो. मुनेश चंद्र त्रिवेदी, प्रो. दीपक शुधालवार, डॉ. रवि आहूजा सहित संस्थान के तकनीकी विशेषज्ञ एवं स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में कक्षा 6 से 8 के लिए संस्थान द्वारा विकसित गतिविधि पुस्तिका “कौशल बोध” की गतिविधियों तथा कक्षा 9 से 12 तक की व्यावसायिक पाठ्यपुस्तकों में एवीजीसी (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग एवं कॉमिक्स) से संबंधित अवधारणाओं के समावेशन पर विस्तृत चर्चा की गई। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को उभरते रचनात्मक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल, रचनात्मकता एवं अनुभवात्मक अधिगम के अवसर प्रदान करना है। विशेषज्ञ संवाद के दौरान आशीष कुलकर्णी ने शैक्षिक सामग्री, ग्राफिक्स एवं डिजिटल कंटेंट में भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) तथा स्थानीय सांस्कृतिक तत्वों के समावेशन पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों एवं स्थानीय संदर्भों पर आधारित दृश्यात्मक सामग्री विद्यार्थियों के अधिगम को अधिक रोचक, प्रभावी एवं संदर्भपरक बना सकती है। उन्होंने इस दिशा में संस्थान की शैक्षणिक एवं तकनीकी टीम को प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग प्रदान करने की सहमति भी व्यक्त की। गौरतलब है कि भारत सरकार के केंद्रीय बजट 2026–27 में एवीजीसी (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग एवं कॉमिक्स) क्षेत्र को बढ़ावा देने हेतु देशभर के 15,000 माध्यमिक विद्यालयों एवं 500 महाविद्यालयों में “एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब्स” स्थापित किए जाने की घोषणा की गई है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को रचनात्मक एवं डिजिटल कौशलों से जोड़ते हुए उन्हें भविष्य के उभरते रोजगार क्षेत्रों के लिए तैयार करना है। यह कार्यक्रम विद्यालयी शिक्षा में नवाचार, रचनात्मकता तथा उद्योग–शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। ईएमएस/07 मई2026