कलाकार प्रकृति का प्रेमी है अत: वह उसका दास भी है और स्वामी भी। - रवींद्रनाथ ठाकुर मनुष्य की इच्छाओं का पेट आज तक कोई नहीं भर सका है। - वेदव्यास ईएमएस / 12 मई 26
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