क्षेत्रीय
12-May-2026
...


- 60 मिनिट में अस्पताल पहुंचकर विकलांगता का खतरा कम किया जा सकता है जबलपुर (ईएमएस)। भारत में स्ट्रोक के मामलों में लगातार बढ़ोतरी के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों से ‘गोल्डन ऑवर’ की अहमियत समझने की अपील कर रहे हैं। यह वह पहला 60 मिनट का समय होता है, जब लक्षण शुरू होने के बाद सही कदम उठाने से मरीज की जान बचाई जा सकती है। जबलपुर की वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नम्रता खंडेलवाल का कहना है कि इस महत्वपूर्ण समय के भीतर इलाज मिलने पर मरीज की स्थिति में काफी सुधार हो सकता है और स्थायी विकलांगता का खतरा कम किया जा सकता है। वर्ल्ड स्ट्रोक ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, दुनिया भर में 25 साल से अधिक उम्र के हर चार में से एक व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी स्ट्रोक हो सकता है और हर साल 1.22 करोड़ से अधिक नए मामले सामने आते हैं। स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग के किसी हिस्से में खून का प्रवाह रुक जाता है, जिससे मस्तिष्क कोशिकाओं को ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते। हर बीतते मिनट के साथ दिमाग को स्थायी नुकसान पहुंचता है, यही वजह है कि स्ट्रोक को सबसे अधिक समय संवेदनशील मेडिकल इमरजेंसी में गिना जाता है। डॉ. नम्रता खंडेलवाल बताती हैं, “गोल्डन ऑवर स्ट्रोक के इलाज के लिए सबसे अहम समय होता है। अगर मरीज इस दौरान स्ट्रोक रेडी अस्पताल पहुंच जाता है, तो डॉक्टर क्लॉट घोलने वाली दवाएं दे सकते हैं या विशेष प्रक्रियाएं कर सकते हैं, जिससे रक्त प्रवाह दोबारा शुरू किया जा सकता है और मस्तिष्क को नुकसान से बचाया जा सकता है। इस समय सीमा के बाद रिकवरी की संभावना तेजी से कम हो जाती है।” स्ट्रोक के शुरुआती चेतावनी संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है। चेहरे का टेढ़ा होना, हाथ में कमजोरी, बोलने में दिक्कत जैसे अचानक दिखने वाले लक्षणों को समझना और तुरंत इमरजेंसी सर्विसेज को कॉल करना बहुत महत्वपूर्ण है। समय पर प्रतिक्रिया देना और मरीज को तेजी से अस्पताल पहुंचाना, उसकी जान बचने और रिकवरी की संभावना को काफी बढ़ा सकता है। स्ट्रोक से बचाव के लिए दिल और रक्त वाहिकाओं की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को नियंत्रित रखना, धूम्रपान छोड़ना और अल्कोहल का सीमित सेवन जैसे कदम प्रभावी रोकथाम उपाय हैं। ईएमएस / 12 मई 2026