अंतर्राष्ट्रीय
13-May-2026


-ईटीजीई और ईटीएनएम ने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अपील वाशिंगटन,(ईएमएस)। ईस्ट तुर्किस्तान गवर्नमेंट-इन-एक्साइल (ईटीजीई) और ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल मूवमेंट (ईटीएनएम) ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अपील की है कि वे बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक में चीन ईस्ट तुर्किस्तान और तिब्बत में किए जा रहे “नरसंहार” और “औपनिवेशिक कब्जे” का मुद्दा उठाएं। बता दें राष्ट्रपति ट्रंप बुधवार को दो दिवसीय चीन की राजकीय यात्रा पर रवाना हुए। करीब एक दशक में किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति की यह पहली चीन यात्रा मानी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप से की गई अपील में ईटीजीई ने आरोप लगाया कि चीनी कब्जे वाले “ईस्ट तुर्किस्तान” में उइगर, कजाख, किर्गिज और अन्य तुर्किक समुदायों के खिलाफ चल रहे नरसंहार का आदेश दिया था। निर्वासित संगठन का दावा है कि इस अभियान को अब 13 साल होने वाले हैं। निर्वासित संगठनों ने अमेरिकी राष्ट्रपति से आग्रह किया कि शिखर सम्मेलन के दौरान ऐसा कोई समझौता न किया जाए जो ईस्ट तुर्किस्तानी और तिब्बती लोगों के “नरसंहार और दासता” को बढ़ावा दे। रिपोर्ट के मुताबिक संगठनों ने कहा कि ईस्ट तुर्किस्तान में चीन के सबसे बड़े बेरिलियम भंडार और लिथियम, जिरकोनियम, रुबिडियम, टाइटेनियम, मैग्नीशियम और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के बड़े भंडार मौजूद हैं। यही वे अहम खनिज हैं जिन पर इस शिखर सम्मेलन में बातचीत हो रही है। इनका दोहन कब्जे वाले क्षेत्र से उन परिस्थितियों में किया जा रहा है जिन्हें संयुक्त राष्ट्र ने मानवता के खिलाफ अपराध के रूप में दासता माना है। ईटीजीई के मुताबिक जिनपिंग के अभियान के तहत “व्यापक नजरबंदी, जबरन श्रम के जरिए बड़े पैमाने पर गुलामी, जबरन नसबंदी, दस लाख से ज्यादा उइगर और अन्य तुर्किक बच्चों को उनके परिवारों से अलग करना और सैकड़ों हजारों लोगों के अंगों की जबरन निकासी” जैसी गतिविधियां जारी हैं। संगठन ने यह भी दावा किया कि चीन के 2026 के “एथनिक यूनिटी लॉ” ने गैर-चीनी पहचान को मिटाने की प्रक्रिया को कानूनी रूप दे दिया है। ईटीजीई के अध्यक्ष मामतिमिन अला ने कहा कि हमारे मानवाधिकारों और अस्तित्व की गारंटी का समाधान उपनिवेशवाद का अंत और ईस्ट तुर्किस्तान की राष्ट्रीय स्वतंत्रता की बहाली करना है। 5 मई को हमने यूएन डिकॉलोनाइजेशन कमेटी में ईस्ट तुर्किस्तान की पहली औपचारिक याचिका दायर की है और हम अमेरिका समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हमारी स्वतंत्रता बहाल करने के संघर्ष का समर्थन करने की अपील करते हैं। निर्वासित संगठनों ने चीन के ईस्ट तुर्किस्तान पर “कब्जे” को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने अपने सभी परमाणु परीक्षण ईस्ट तुर्किस्तानी क्षेत्र में किए हैं, जिनमें 2020 का एक परीक्षण भी शामिल है, और अब वहां अमेरिका को निशाना बनाने वाले सैकड़ों अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल साइलो का निर्माण कर रहा है। संगठनों ने दावा किया कि चीन ने इस क्षेत्र में अहम एआई और डेटा सेंटर अवसंरचना स्थापित की है। ईटीजीई के विदेश मंत्री और ईटीएनएम के अध्यक्ष सलीह हुदयार ने कहा कि शिखर सम्मेलन में जिन अहम खनिजों पर चर्चा हो रही है, वे सब कब्जे वाले ईस्ट तुर्किस्तान से नरसंहार और दासता के जरिए निकाले जा रहे हैं। एक स्वतंत्र और मुक्त ईस्ट तुर्किस्तान अमेरिका को प्रतिस्पर्धी दरों पर ये खनिज उपलब्ध करा सकता है, जिससे अमेरिकी उद्योग मजबूत होगा और बीजिंग की पकड़ कमजोर पड़ेगी। सिराज/ईएमएस 13मई26