ईरान की चेतावनी के बाद चिंतित दुनिया तेहरान,(ईएमएस)। अमेरिका और इजराइल से जारी जंग के बीच ईरानी मीडिया ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे बिछी समुद्री इंटरनेट केबलें खतरे में पड़ सकती हैं। यदि कई प्रमुख अंडरसी केबलें एक साथ प्रभावित होती हैं, चाहे तकनीकी खराबी के कारण या किसी सुनियोजित कार्रवाई से, तब पूरे फारस की खाड़ी क्षेत्र में इंटरनेट और संचार सेवाओं पर गंभीर असर होगा। विशेषज्ञ इस मामले को केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक डिजिटल नेटवर्क के लिए एक गंभीर चिंता बता रहे हैं। ईरान की ओर से संकेत दिए गए हैं कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाली इन अंडरसी इंटरनेट केबलों के रखरखाव और नियमों पर अपनी निगरानी और पकड़ बढ़ा सकता है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक है, जिसे अब तक मुख्य रूप से तेल और गैस आपूर्ति के लिए अहम माना जाता था। हालांकि, डिजिटल युग में इसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हुई है, क्योंकि एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व को जोड़ने वाली कई अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट केबलें इसी क्षेत्र से होकर गुजरती हैं। दरअसल, दुनिया का अधिकांश इंटरनेट डेटा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबलों के जरिए एक देश से दूसरे देश तक पहुंचता है। आम धारणा के विपरीत, इंटरनेट केवल सैटेलाइट पर निर्भर नहीं है। ऑनलाइन बैंकिंग, क्लाउड सेवाएं, सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ा अधिकांश डेटा इन्हीं केबलों के माध्यम से संचालित होता है। इसके बाद यदि इन केबलों में तकनीकी खराबी आती है या किसी क्षेत्र में राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तब कई देशों की इंटरनेट स्पीड और डिजिटल सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार का सैन्य या राजनीतिक तनाव अब केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी दिखाई देगा। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि भविष्य में इन अंडरसी केबलों से आर्थिक लाभ लेने की कोशिश की जा सकती है। जिस तरह ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूलने की नीति अपना रहा है, उसी तरह डिजिटल टोल बूथ जैसी अवधारणाओं पर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, अभी तक डेटा ट्रैफिक पर शुल्क लगाने या किसी अंतरराष्ट्रीय डिजिटल टोल व्यवस्था को लागू करने संबंधी कोई आधिकारिक वैश्विक नियम नहीं बनाया गया है, लेकिन इस तरह की चर्चाओं ने तकनीकी और रणनीतिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर भविष्य में डेटा ट्रांसमिशन पर नियंत्रण या अतिरिक्त शुल्क लगाने जैसी स्थिति बनती है, तो इसका गहरा असर वैश्विक इंटरनेट सेवाओं, डिजिटल कारोबार और अंतरराष्ट्रीय संचार व्यवस्था पर पड़ सकता है। आशीष दुबे / 13 मई 2026