भारत-यूरोप की भूमिका पर सवाल वाशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीजिंग दौरे और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी प्रस्तावित शिखर वार्ता ने वैश्विक राजनीति में ‘जी2’ यानी अमेरिका-चीन के साझा प्रभुत्व की बहस को फिर से गरमा किया है। इस दो दिवसीय दौरे को मात्र एक राजनयिक भेंट नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन के एक अहम संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हाल के महीनों में कई अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर चीन की संयमित प्रतिक्रिया ने इस बहस को और हवा दी है। वेनेजुएला विवाद और ईरान युद्ध जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चीन ने खुलकर अमेरिका का विरोध करने से परहेज किया है। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों महाशक्तियों के बीच एक प्रकार की ‘मौन सहमति’ पनप रही है, इसके तहत वे एक-दूसरे के प्रभाव क्षेत्रों में सीधा हस्तक्षेप टाल रहे हैं। जी2 की अवधारणा पहली बार 2005 में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ने दी थी, जिसका उद्देश्य वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए इन दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग था। बराक ओबामा के कार्यकाल में भी अमेरिका-चीन रणनीतिक संवाद इसी सोच का विस्तार था। हालांकि, अब यह बहस केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रही है। ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति, यूरोप के साथ बढ़ती दूरियां और भारत के प्रति बदलते अमेरिकी रुख ने कई देशों को यह सोचने पर मजबूर किया है कि क्या दुनिया धीरे-धीरे दो ध्रुवों में बंट रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और चीन वैश्विक फैसलों पर मिलकर प्रभाव डालने लगते हैं, तब भारत, यूरोपीय संघ, जापान, ब्राजील और रूस जैसी शक्तियों की भूमिका सीमित हो सकती है। वहीं भारत लगातार एक बहुपक्षीय वैश्विक व्यवस्था की वकालत कर रहा है। नई दिल्ली ने हाल के वर्षों में अपनी रणनीतिक और आर्थिक साझेदारियों को तेजी से विस्तार दिया है। ब्राजील के साथ व्यापार बढ़ाने, ब्रिक्स देशों के साथ सहयोग मजबूत करने और यूरोपीय संघ के साथ बड़े व्यापारिक समझौतों की दिशा में कदम इसी रणनीति का हिस्सा हैं। भारत का लक्ष्य अपनी अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रभाव को इतना सशक्त करना है कि किसी संभावित जी2 व्यवस्था के संतुलन को चुनौती दी जा सके। विश्लेषकों के अनुसार, फिलहाल ट्रंप-शी बैठक को औपचारिक जी2 गठबंधन की शुरुआत कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन यह स्पष्ट है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियां अब टकराव और सहयोग के बीच एक नया संतुलन तलाश रही हैं। आशीष दुबे / 13 मई 2026