कुवैत,(ईएमएस)। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, कुवैत ने ईरान पर एक बड़ा आरोप लगाया है। कुवैत का दावा है कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े लोगों ने चीन की मदद से बन रहे महत्वपूर्ण पोर्ट प्रोजेक्ट को टारगेट करने की कोशिश की। यह घटना 1 मई को फारस की खाड़ी में स्थित बुबियान आइलैंड पर हुई, जहां मुबारक अल कबीर पोर्ट का निर्माण हो रहा है। यह पोर्ट चीन की वैश्विक बेल्ट एंड रोड पहल का हिस्सा है और बीजिंग इस पोर्ट को मध्य पूर्व में अपनी रणनीतिक उपस्थिति मजबूत करने के लिए बेहद अहम मानता है। कुवैती सुरक्षा बलों ने घुसपैठ की कोशिश कर रहे चार लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि दो भागने में सफल रहे। हालांकि, कुवैत ने घटना को सार्वजनिक करने में इतनी देर क्यों की, यह स्पष्ट नहीं है। शुरुआत में सिर्फ घुसपैठ की जानकारी दी गई थी, लेकिन अब जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के दौरे पर हैं और शी जिनपिंग से मुलाकात करने वाले हैं, इस खुलासे को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहे चीन के लिए होर्मुज स्ट्रेट में जारी अवरोधों के बीच यह कथित हमला चिंता बढ़ाने वाला है। इस बीच, इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रिश्तों में भी नई नजदीकी देखने को मिली है। अमेरिका में इजरायल के राजदूत ने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया कि इजरायल ने यूएई में आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य कर्मियों को तैनात किया है। उधर, अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कांग्रेस में दावा किया कि अमेरिका अब भी होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए हुए है, हालांकि ईरानी हमलों के कारण तेल और गैस की आपूर्ति लगातार प्रभावित हो रही है, जिससे युद्ध की लागत 29 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। नॉर्वे ने भी ईरान पर दबाव बढ़कर साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट और व्यापारिक जहाजों पर असर पूरी तरह अस्वीकार्य है, जहां उसके लगभग 25 जहाज अभी भी फंसे हुए हैं। आशीष दुबे / 13 मई 2026