अंतर्राष्ट्रीय
13-May-2026


वाशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव में मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान अब खुद मुश्किल कूटनीतिक स्थिति में फंस गया है। उस पर ईरान को गुप्त समर्थन देने के आरोप लगे हैं, इसकारण इस्लामाबाद अब चीन और अमेरिका की डिप्लोमेसी के बीच फंसता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने कथित तौर पर ईरानी सैन्य विमानों को अपने नूर खान एयरबेस का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी, ताकि वे संभावित अमेरिकी हमलों से बच सकें। हालांकि, पाकिस्तान ने इन दावों को भ्रामक और सनसनीखेज बताकर खारिज किया है। लेकिन इस मुद्दे ने अमेरिकी राजनीति में हलचल मचा दी है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने खुले तौर पर पाकिस्तान पर अविश्वास जाहिर किया है। उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से सीधे सवाल किया कि अगर पाकिस्तान सच में ईरानी विमानों को अपने एयरबेस पर जगह दे रहा है, तब क्या पाकिस्तान को एक निष्पक्ष मध्यस्थ माना जा सकता है। ग्राहम ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान पर बिल्कुल भरोसा नहीं और शायद इसी वजह से शांति वार्ता आगे नहीं बढ़ पा रही। हेगसेथ ने इस पर सीधा जवाब देने से परहेज किया, लेकिन ग्राहम ने वॉशिंगटन में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर गंभीर संदेह पैदा होने की बात साफ कर दी। दूसरी ओर, चीन लगातार पाकिस्तान का समर्थन करता दिख रहा है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार से फोन पर बातचीत के दौरान पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों की तारीफ कर कहा कि बीजिंग उसके क्षेत्रीय शांति बहाल करने के प्रयासों का समर्थन करता रहेगा। चीन की यह दिलचस्पी होर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव से उपजी है, जो ईरानी तेल के बड़े खरीदार चीन की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करता है। ऐसे में बीजिंग चाहता है कि हालात काबू में रहें और तेल सप्लाई सामान्य हो सके। उधर, पाकिस्तान खुद को एक जिम्मेदार मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहा है, जिसका कहना है कि उसने सिर्फ कूटनीतिक और प्रशासनिक सहयोग दिया था ताकि वार्ता प्रक्रिया चल सके। लेकिन अमेरिका में उठते सवालों ने उसकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब पाकिस्तान ऐसे नाजुक हालात में फंस गया है, जहां उसे एक तरफ चीन का समर्थन मिल रहा है, जबकि दूसरी तरफ अमेरिका उसकी नीयत पर शक जता रहा है। यही वजह है कि ईरान संकट में मध्यस्थ बनने की उसकी कोशिश अब उसके लिए एक बड़ा कूटनीतिक जोखिम बनती जा रही है। आशीष दुबे / 13 मई 2026