अंतर्राष्ट्रीय
13-May-2026


बीजिंग (ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने बहुप्रतीक्षित चीन दौरे पर बीजिंग पहुंच गए हैं, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। ईरान संकट के बीच यह यात्रा न केवल तात्कालिक मुद्दों को संबोधित करेगी, बल्कि आने वाले कई सालों तक अमेरिका-चीन संबंधों की नींव भी रखेगी। ट्रंप के साथ अमेरिकी कारोबारियों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी चीन जा रहा है। यात्रा से ठीक पहले, चीन ने अमेरिका को एक स्पष्ट चेतावनी देकर अपनी चार रेडलाइन बता दी हैं, जिन्हें चुनौती न देने को कहा गया है। चीन के अमेरिकी दूतावास ने इन चार रेडलाइन का विस्तृत ब्यौरा दिया है। पहली और सबसे महत्वपूर्ण रेडलाइन ताइवान का मुद्दा है। चीन दृढ़ता से कहता है कि ताइवान उसका अभिन्न अंग है और जरूरत पड़ने पर वह बलपूर्वक भी उस पर कब्जा करने से पीछे नहीं हटेगा। यह स्थिति इसलिए संवेदनशील है क्योंकि ताइवान की अमेरिका के साथ रक्षा संधि है, और जापान व फिलीपींस जैसे अमेरिकी सहयोगी देश चीनी दावे को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं। दूसरी रेडलाइन लोकतंत्र और मानवाधिकारों से जुड़ी है। अमेरिका अक्सर चीन पर मानवाधिकारों के उल्लंघन, विशेषकर उइगुर बहुल शिनजियांग प्रांत में दमनकारी नीतियों को लेकर आरोप लगाता रहता है। तीसरी रेडलाइन चीन की एकल-पार्टी कम्युनिस्ट राजनीतिक व्यवस्था है, जबकि चौथी और अंतिम रेडलाइन चीन के विकास के अधिकार से जुड़ी है। चीन ने साफ किया है कि इन चारों को किसी भी कीमत पर चुनौती नहीं दी जानी चाहिए। दूसरी ओर, चीन रवाना होने से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग के साथ अपने संबंधों की जमकर तारीफ की। उन्होंने उम्मीद जाहिर कि यह यात्रा व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और ईरान संकट जैसे अहम वैश्विक मुद्दों पर बेहतरीन बातचीत का मंच बनेगी। व्हाइट हाउस से प्रस्थान करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतें हैं और उनके द्विपक्षीय संबंध मजबूत और स्थिर हैं। ट्रंप ने कहा, राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मेरे रिश्ते शानदार हैं, और हम हमेशा अच्छी तरह साथ रहे हैं। चीन के साथ काम करना बहुत अच्छा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि शिखर वार्ता में व्यापार सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा। ट्रंप ने इसका खुलासा किया कि जिनपिंग इस साल के अंत तक अमेरिका का दौरा कर सकते हैं। ईरान संकट पर चीन की संभावित भूमिका का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि यदि शी जिनपिंग इस मामले में मदद करते हैं, तो उसका स्वागत होगा। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अमेरिका स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित कर रहा है और ईरान सैन्य रूप से कमजोर हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिका-चीन आर्थिक संबंधों को दोनों देशों के लिए फायदेमंद बताया। उन्होंने कहा, हम चीन के साथ बहुत बड़ा व्यापार करते हैं। हम भी फायदा उठा रहे हैं और चीन भी। ट्रंप ने अपनी यात्रा के मकसद को केवल व्यापार तक सीमित न बताकर वैश्विक रणनीतिक संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अमेरिका को दुनिया की सबसे मजबूत सैन्य ताकत बताकर चीन को दूसरा सबसे शक्तिशाली देश माना। यह दौरा दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक, ताइवान और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते मतभेदों के बावजूद कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा है। आशीष दुबे / 13 मई 2026