इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने दो काले हिरणों की मौत से जुड़े मामले में अवैध हिरासत का आरोप लगाते दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज करते कोर्ट ने कहा कि ऐसी याचिका तब स्वीकार्य नहीं है, जब याचिकाकर्ता की ज़मानत अर्जी पहले ही इस कोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी हो। याचिका कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि दिसंबर 2024 में सलमान, इम्तियाज़ और जौहर हुसैन सहित तीन लोगों को 64.70 किलोग्राम मांस के साथ पकड़ा था। यह मांस संरक्षित वन्यजीव प्रजातियों, विशेष रूप से काले हिरणों और चिंकारा का था। अधिकारियों ने उनके कब्ज़े से एक देसी पिस्तौल (कारतूसों के साथ), एक मोबाइल फोन और एक वाहन भी बरामद किया। इसके बाद आरोपियों के मेमोरेंडम बयानों के आधार पर याचिकाकर्ता को 27 अक्टूबर, 2025 को गिरफ्तार कर लिया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने यह दलील दी कि उससे कोई बरामदगी नहीं हुई थी। उसे केवल सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर ही इस मामले में फंसाया गया। इसके अलावा, वकील ने यह भी तर्क दिया कि याचिकाकर्ता को उसकी गिरफ्तारी के कारणों के बारे में सूचित नहीं किया गया था, जबकि कानून के तहत ऐसी जानकारी देना अनिवार्य है। राज्य सरकार के वकील ने इस याचिका का विरोध करते हुए यह तर्क दिया कि यह याचिका स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि याचिकाकर्ता की हिरासत को अवैध नहीं कहा जा सकता। पीठ को बताया गया कि गिरफ़्तारी के बाद याचिकाकर्ता ने ज़मानत अर्ज़ी दायर की थी, जिसे फ़रवरी 2026 में हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। जिसके बाद कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि उक्त आदेश से यह पता चलता है कि मौजूदा याचिकाकर्ता एक वीडियो क्लिप में दो मृत काले हिरणों के साथ दिखा था। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि याचिकाकर्ता अवैध हिरासत में है, क्योंकि सभी ज़रूरी प्रक्रियाओं का पालन किया गया। इन परिस्थितियों में याचिकाकर्ता की न्यायिक हिरासत को अवैध हिरासत नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले स्टेट ऑफ़ मध्य प्रदेश बनाम कुसुम साहू पर भरोसा करते हुए कोर्ट ने दोहराया कि एक बार जब कोई आरोपी किसी वैध न्यायिक आदेश के तहत न्यायिक हिरासत में होता है तो सिर्फ़ इसलिए हैबियस कॉर्पस की रिट याचिका स्वीकार्य नहीं होती कि उसे ज़मानत नहीं मिली। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका खारिज करते याचिकाकर्ता को यह छूट दी कि वह ट्रायल कोर्ट के सामने अपने सभी उपलब्ध आधार पेश कर सकता है। आनंद पुरोहित/ 14 मई 2026