राज्य
15-May-2026


पटना, (ईएमएस)। बिहार में आने वाले दिनों में बड़े पुलों और प्रमुख सड़कों पर सफर करना महंगा पड़ सकता है। राज्य सरकार पहली बार अपनी अलग टोल टैक्स नीति लागू करने की तैयारी में जुट गई है। पथ निर्माण विभाग इस नई नीति को अंतिम रूप देने में लगा है। खास बात यह है कि अब पुलों पर टोल टैक्स उनकी लंबाई के आधार पर तय किया जाएगा। इसके लिए विभाग नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की गाइडलाइंस को आधार बनाकर नया फॉर्मूला तैयार कर रहा है, ताकि सड़कों और पुलों के रखरखाव के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जा सके। प्रस्तावित नीति के अनुसार, पुलों पर टोल वसूली का तरीका अलग होगा। विभाग द्वारा तैयार शुरुआती फॉर्मूले में पुल के मुख्य हिस्से की वास्तविक लंबाई को 10 से गुणा कर टोल की गणना करने का प्रस्ताव है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी पुल का मुख्य हिस्सा 5 किलोमीटर लंबा है, तो टोल की गणना 50 किलोमीटर के हिसाब से की जाएगी। इसके अलावा पुल से जुड़ी एप्रोच रोड पर भी प्रति किलोमीटर 60 से 65 पैसे तक शुल्क लेने की योजना है। पुल और एप्रोच रोड दोनों का शुल्क जोड़कर अंतिम टोल टैक्स तय किया जाएगा। नई नीति में निजी चारपहिया वाहनों, कॉमर्शियल गाड़ियों और भारी मालवाहक वाहनों के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की जाएंगी। निजी वाहनों के लिए जहां प्रति किलोमीटर 60-65 पैसे शुल्क प्रस्तावित है, वहीं भारी वाहनों से अधिक टोल लिया जा सकता है। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभी इस फॉर्मूले पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है और विशेषज्ञों की राय के बाद इसमें बदलाव संभव है। अब तक बिहार सरकार की अपनी कोई स्वतंत्र टोल टैक्स नीति नहीं थी। राष्ट्रीय राजमार्गों पर एनएचएआई के नियम लागू होते थे, लेकिन राज्य सरकार द्वारा बनाए गए बड़े पुलों और सड़कों के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। सरकार का मानना है कि बढ़ते यातायात और इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है, इसी वजह से नई नीति लाई जा रही है। सरकार का दावा है कि टोल से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल सड़कों और पुलों की मरम्मत, रखरखाव और नई सुविधाओं के विकास में किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक कई महत्वपूर्ण पुलों और सड़कों की देखभाल पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में टोल व्यवस्था लागू होने से इन परियोजनाओं के लिए स्थायी फंड उपलब्ध हो सकेगा। हालांकि प्रस्तावित टोल नीति को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया मिश्रित है। सरकार इसे विकास और बेहतर सड़क सुविधा के लिए जरूरी कदम बता रही है, लेकिन आम लोगों को डर है कि इससे रोजमर्रा की यात्रा का खर्च बढ़ जाएगा। खासकर नौकरी और व्यवसाय के सिलसिले में रोज यात्रा करने वाले लोगों पर इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। इसी को देखते हुए सरकार ने स्थानीय लोगों को राहत देने की भी तैयारी की है। प्रस्ताव के अनुसार, टोल प्लाजा के आसपास रहने वाले लोगों को टैक्स में छूट दी जाएगी। वहीं रोज सफर करने वाले नौकरीपेशा और व्यवसायी लोगों के लिए मंथली पास की सुविधा शुरू करने की योजना है, जिससे उन्हें बार-बार पूरा टोल नहीं देना पड़ेगा। पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार नई टोल नीति का ड्राफ्ट लगभग तैयार है और जल्द ही इसे सरकार के सामने पेश किया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद राज्य के बड़े पुलों और चुनिंदा मुख्य सड़कों पर नई व्यवस्था लागू की जा सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि बिहार सरकार की यह नई टोल नीति लोगों को बेहतर सुविधाएं दे पाएगी या आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ाएगी। संतोष झा- १५ मई/२०२६/ईएमएस