राष्ट्रीय
17-May-2026


पटना (ईएमएस)। बिहार में लगातार सामने आ रहे पुल हादसों और ढांचागत कमजोरियों के बीच अब राज्य सरकार बड़े स्तर पर पुलों की सुरक्षा जांच में जुट गई है। इसी क्रम में आईआईटी पटना की ताजा स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट में राज्य के 9 महत्वपूर्ण पुलों में गंभीर तकनीकी और संरचनात्मक खामियां सामने आई हैं। इसके बाद पथ निर्माण विभाग, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम और संबंधित एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। सूत्रों के अनुसार, जिन पुलों में खामियां मिली हैं, उन पर रोजाना हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। रिपोर्ट में पुलों के पिलर, स्लैब, बेयरिंग, एक्सपेंशन जॉइंट और सुपर स्ट्रक्चर में कमजोरी, दरार, जंग और अत्यधिक कंपन जैसी समस्याओं का जिक्र किया गया है। कुछ पुलों की लोड क्षमता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते ट्रैफिक दबाव, भारी वाहनों की लगातार आवाजाही और समय पर मरम्मत नहीं होने से कई पुराने पुल कमजोर होते जा रहे हैं। हाल के महीनों में बिहार में पुल गिरने और क्षतिग्रस्त होने की कई घटनाएं सामने आई थीं, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ गया था। भागलपुर के विक्रमशीला सेतु पर हाल में स्लैब टूटने की घटना के बाद मुख्यमंत्री स्तर पर समीक्षा बैठक हुई और बड़े पुलों का वैज्ञानिक ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया। इसी के तहत 250 मीटर से अधिक लंबे 85 बड़े पुलों की जांच की जिम्मेदारी आईआईटी पटना और आईआईटी पटना दिल्ली को सौंपी गई है। दक्षिण बिहार के 45 पुलों की जांच आईआईटी पटना कर रहा है, जबकि उत्तर बिहार के 40 पुलों का ऑडिट आईआईटी दिल्ली के जिम्मे है। सरकार ने “बिहार स्टेट ब्रिज मेंटेनेंस पॉलिसी-2025” भी लागू की है. इसके तहत पहली बार पुलों की नियमित हेल्थ मॉनिटरिंग की व्यवस्था शुरू की जा रही है। अब पुलों की जांच आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रोन सर्वे, सेंसर आधारित निगरानी, डिजिटल मैपिंग और कंपन मापने वाली मशीनों की मदद से की जाएगी, ताकि समय रहते खतरे की पहचान कर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। चन्द्रबली सिंह / 17/05/2026