राज्य
17-May-2026
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:: पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में हुआ शुभारंभ – प्रतिदिन सुबह एवं शाम को होगा भागवत एवं रामायण का मूल पारायण :: इंदौर (ईएमएस)। एयरपोर्ट रोड, पीलियाखाल स्थित प्राचीन हंसदास मठ पर पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) के पावन उपलक्ष्य में धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला रविवार से शुरू हो गया। हंस पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी रामचरणदास एवं महामंडलेश्वर महंत पवनदास के सान्निध्य में 108 विद्वानों ने भगवान रणछोड़जी एवं टीकमजी सहित सभी देवी-देवताओं की साक्षी में भागवत के मूल पारायण का मंगल शुभारंभ किया। अनुष्ठान के प्रारंभ में एक अनूठा और आस्था से सराबोर दृश्य देखने को मिला। मठ परिसर में यजमानों एवं संत-विद्वानों ने नंगे पैर भागवतजी को मस्तक पर धारण कर परिक्रमा की। भागवतजी के साथ भगवान पुरुषोत्तम एवं टीकमजी के गगनभेदी जयघोष के बीच विद्वानों ने पहले मंडल स्थापना की। इसके पश्चात मंडल पूजन एवं गणेश अम्बिका पूजन कर भागवत एवं रामायण के पारायण तथा ओम नमो भगवते वासुदेवाय महामंत्र का जाप प्रारम्भ किया। :: 15 जून तक चलेंगे दिव्य अनुष्ठान :: मठ परिवार के महंत पं. अमितदास महाराज ने बताया कि मठ की प्राचीन परम्परा के अनुसार अधिकमास के उपलक्ष्य में रविवार से पूरे माह प्रतिदिन सुबह 9 से 12 एवं शाम 4 से 7 बजे तक 108 विद्वानों द्वारा यह दिव्य अनुष्ठान किया जाएगा, जो 15 जून तक अनवरत चलेगा। रविवार को आयोजित शोभायात्रा में भक्त मंडल के हरि अग्रवाल, अशोक गोयल, राजेंद्र सोनी, राजेंद्र गर्ग सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भावविभोर होकर शामिल हुए। :: होंगे कई विशेष उत्सव, गौमाता बनेंगी साक्षी :: महंत अमितदास के अनुसार, पुरुषोत्तम मास में प्रतिदिन महाआरती होगी तथा ब्राह्मण एवं संतों के लिए प्रसादी का आयोजन भी किया जाएगा। इस दौरान मठ पर भगवान के नौका विहार, फूलों की होली, संगीतमय सुंदरकाण्ड पाठ और अधिकमास की एकादशी पर विभिन्न विशेष उत्सव आयोजित होंगे। :: गौसेवा के विशेष प्रबंध :: यह सम्पूर्ण आयोजन आश्रम स्थित गौशाला में पल रही गौमाता की साक्षी में हो रहा है। मठ परिसर में पूजा-अर्चना, दर्शन, गौसेवा और ब्राह्मण सेवा के लिए समिति द्वारा व्यापक व विशेष प्रबंध किए गए हैं। प्रकाश/17 मई 2026 संलग्न चित्र - इंदौर। हंसदास मठ पर पुरुषोत्तम मास के शुभारंभ अवसर पर मस्तक पर भागवतजी को धारण कर नंगे पैर मठ की परिक्रमा करते महामंडलेश्वर महंत पवनदास एवं अन्य श्रद्धालु।