:: पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में खजराना गणेश मंदिर में भागवत ज्ञान यज्ञ प्रारंभ; शोभायात्रा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब :: इंदौर (ईएमएस)। कलियुग में हरि नाम ही सबसे सरल, सुगम और कल्याणकारी मार्ग है। पुरुषोत्तम मास को स्वयं भगवान विष्णु ने अपना नाम दिया है, इसलिए इस पवित्र माह में की गई भक्ति और साधना का अनंत गुना फल प्राप्त होता है। श्रीमद्भागवत स्वयं भगवान की वाङ्मयी मूर्ति है। रचना के पांच हजार वर्षों के बाद भी देश के गाँव-गाँव और गली-गली में भागवत की गूंज बने रहना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि भागवत, भारत, भगवान, भक्ति और भक्त ये सब एक-दूसरे के पूरक और पर्याय हैं। इनकी महत्ता किसी भी काल में कम नहीं हो सकती। ये प्रेरक और दिव्य विचार अंतर्राष्ट्रीय भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी के हैं। वे सप्त ऋषि भागवत मंडल के तत्वावधान में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में रविवार से खजराना गणेश मंदिर स्थित सत्संग सभागृह में प्रारंभ हुए भागवत ज्ञान यज्ञ के शुभारंभ सत्र में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत जी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो पुरुषोत्तम मास के प्रसंग पर शहर की पहली शोभायात्रा रही। मंगल कलश और पावन ग्रंथ को शीश पर धारण किए श्रद्धालु जब भक्ति धुनों पर थिरकते हुए निकले, तो पूरा परिसर जयकारों से गुंजायमान हो गया। शोभायात्रा में महिलाएं पारंपरिक लाल चुनरी एवं पुरुष चुनरी की जैकेट पहनकर शामिल हुए, जो आयोजन के मुख्य आकर्षणों में से एक रही। कथा के प्रथम दिन व्यास पीठ का विधि-विधान से पूजन मुख्य मनोरथी समूह के अशोक-आरती खंडेलवाल, रामचंद्र-उषा पितलिया, लक्ष्मण-चंद्रकांता कानूनगो, हितेंद्र-वन्दना ग्रोवर, स्वप्न-स्वाति खंडेलवाल, महेंद्र-दिव्या मानधन्या एवं आशीष-खनक शर्मा ने किया। इस धार्मिक अनुष्ठान में नगर निगम महापौर परिषद के सदस्य राजेंद्र राठोर, पार्षद मनोज मिश्रा एवं महेंद्र मालवीय सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने भी सम्मिलित होकर व्यास पीठ का आशीर्वाद लिया। :: जीने की कला रामायण और मरने की कला सिखाती है भागवत :: पं. तिवारी ने भागवत की महत्ता प्रतिपादित करते हुए मर्मस्पर्शी बात कही। उन्होंने कहा, यह ग्रंथ हजारों वर्षों से सुना जा रहा है, फिर भी यह हमेशा नूतन और प्रेरक लगता है। निष्काम और निर्मल मन से की गई भक्ति ही सच्ची भक्ति है। भागवत एक ऐसी दिव्य औषधि है जिसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। धन से सांसारिक जरूरतें पूरी हो सकती हैं, लेकिन इच्छाओं और मन की तृप्ति केवल सत्संग से ही संभव है। उल्लेखनीय है कि पं. तिवारी दुबई, सिंगापुर, मॉरीशस, श्रीलंका सहित कई देशों में सनातन धर्म की पताका फहरा चुके हैं। :: उत्सवों के रंग में रंगेगी कथा, प्रतिदिन रहेगा विशेष ड्रेस कोड :: आयोजक समिति की संध्या-कैलाश किलकिलिया एवं उषा-विनोद केदावत ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 3.30 बजे से शाम 7 बजे तक होगी, जिसमें भक्तों की सुविधा के लिए उत्तम प्रबंध किए गए हैं। इस कथा की विशेषता यह है कि प्रसंगानुसार प्रत्येक दिन श्रद्धालुओं के लिए विशेष ड्रेस कोड तय किया गया है। सोमवार 18 मई को शिव विवाह के पावन प्रसंग पर सभी श्रद्धालु नीले परिधान में उपस्थित रहेंगे। मंगलवार 19 मई को वामन अवतार प्रसंग के अवसर पर लहरिया एवं पिंक रानी कलर का संयोजन रहेगा। बुधवार 20 मई को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम रहेगी, जहाँ श्रद्धालु पीताम्बर परिधान में सज-धजकर आएंगे। गुरुवार 21 मई को गोवर्धन पूजा के पावन उत्सव पर हरे रंग का ड्रेस कोड निर्धारित किया गया है, जबकि शुक्रवार 22 मई को होने वाले मुख्य रुक्मणी विवाह उत्सव में सभी अपनी पसंद के भव्य परिधानों में शामिल हो सकेंगे। अंत में, शनिवार 23 मई को सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष एवं कथा विश्राम के भावपूर्ण प्रसंग के साथ श्रद्धालु लाल रंग के परिधान पहनकर इस भक्ति अनुष्ठान के साक्षी बनेंगे। प्रकाश/17 मई 2026