क्षेत्रीय
17-May-2026


धार (ईएमएस)। मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। एक ओर हिंदू पक्ष यहां पूजा-अर्चना, हवन और महाआरती को लेकर उत्साहित नजर आ रहा है, तो दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है। भोजशाला परिसर में इन दिनों धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं। हाल ही में परिसर में गोमूत्र से शुद्धिकरण, गर्भगृह में अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित करने और मां वाग्देवी की प्रतीकात्मक प्रतिमा स्थापना जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। इससे पूरे परिसर का माहौल धार्मिक रंग में रंगा दिखाई दे रहा है। इधर, कमाल मौला मस्जिद नमाज इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष जुल्फीकार पठान ने हाई कोर्ट के आदेश को अस्वीकार करते हुए कहा है कि मुस्लिम पक्ष इस फैसले से सहमत नहीं है। उनका कहना है कि मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों और दस्तावेजों को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कमेटी अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाएगी और कानूनी रूप से अपनी बात मजबूती से रखेगी। जुल्फीकार पठान के अनुसार, भोजशाला को केवल मंदिर के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं है। उनका दावा है कि यहां करीब 800 वर्षों से नमाज अदा की जाती रही है और कई सरकारी दस्तावेजों व नोटिफिकेशन में इसे मस्जिद के रूप में भी दर्ज किया गया है। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि एएसआई पहले कई मौकों पर इसे मस्जिद बता चुका है, लेकिन अब उसके स्वरूप को लेकर अलग रुख अपनाया जा रहा है। इसी विरोधाभास के कारण विवाद और गहराता जा रहा है। चन्द्रबली सिंह / 17/05/2026