ज़रा हटके
19-May-2026
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66 साल पहले गणनाओं से निकली विनाशकारी तारीख वॉशिंगटन (ईएमएस)। दुनिया के अंत यानी प्रलय को लेकर इतिहास में कई भविष्यवाणियां की जाती रही हैं। इनमें से ज्यादातर भविष्यवाणियां धार्मिक मान्यताओं, रहस्यमयी कथाओं या अंधविश्वासों से जुड़ी रही हैं, लेकिन करीब 66 साल पहले एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने पूरी तरह से गणितीय गणनाओं के आधार पर मानव सभ्यता के अंत की आशंका जताई थी। अमेरिकी भौतिकशास्त्री हेंज वॉन फॉर्स्टर ने अपनी एक पुरानी रिसर्च में दावा किया था कि 13 नवंबर 2026 वह तारीख हो सकती है, जब पृथ्वी पर मानव सभ्यता गंभीर संकट के चरम पर पहुंच जाएगी। उनकी यह ऐतिहासिक स्टडी वर्तमान समय में एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। हेंज वॉन फॉर्स्टर ने अपनी रिसर्च टीम के साथ मिलकर वैश्विक जनसंख्या वृद्धि का बेहद गहन अध्ययन किया था। उनकी यह विस्तृत रिसर्च वर्ष 1960 में एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय विज्ञान जर्नल में प्रकाशित हुई थी। यह अध्ययन किसी काल्पनिक सोच या अंधविश्वास पर आधारित नहीं था, बल्कि पूरी तरह आंकड़ों, जनसंख्या वृद्धि के ऐतिहासिक पैटर्न और जटिल गणितीय समीकरणों पर तैयार किया गया था। वैज्ञानिकों ने अपनी गणनाओं में पाया था कि दुनिया की आबादी सामान्य रफ्तार से नहीं, बल्कि अत्यधिक तीव्र गति से बढ़ रही है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और खाद्यान्न उत्पादन में हुई अप्रत्याशित वृद्धि के कारण वैश्विक स्तर पर मृत्यु दर तेजी से कम हुई, जिससे जनसंख्या विस्फोट जैसी स्थिति पैदा होने लगी। फॉर्स्टर ने इस जनसंख्या वृद्धि के प्रभावों को समझने के लिए एक विशेष गणितीय मॉडल तैयार किया था। इस मॉडल के आधार पर उन्होंने अनुमान लगाया कि यदि वैश्विक आबादी इसी रफ्तार से लगातार बढ़ती रही, तो एक समय ऐसा आएगा जब पृथ्वी की प्राकृतिक संसाधन क्षमता पूरी तरह जवाब दे देगी। उन्होंने 13 नवंबर 2026 को उस संभावित बिंदु के रूप में चिन्हित किया था, जहां हालात मानव नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। रिसर्च में साफ चेतावनी दी गई थी कि अत्यधिक जनसंख्या के कारण भोजन, स्वच्छ पानी और रहने की जगह जैसे बुनियादी संसाधनों पर भारी संकट खड़ा हो सकता है। संसाधनों की भारी कमी के कारण विभिन्न देशों और समाजों के बीच आपसी संघर्ष बेहद बढ़ सकते हैं, जिससे युद्ध, अकाल और नई महामारियों जैसी भयावह स्थितियां पैदा होने का सीधा खतरा रहेगा। फॉर्स्टर ने इसी संभावित भयावह स्थिति को डूम्सडे यानी प्रलय का दिन बताया था। हालांकि, वर्तमान समय के आधुनिक वैज्ञानिक इस भविष्यवाणी को पूरी तरह सटीक नहीं मानते हैं। उनका तर्क है कि हाल के वर्षों में दुनिया के कई बड़े देशों में जन्म दर में उल्लेखनीय कमी आई है और तकनीकी प्रगति ने प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के नए रास्ते खोले हैं। इसके बावजूद, यह पुरानी रिसर्च आज भी दुनिया को चेतावनी देती है कि यदि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर गंभीरता से काम नहीं किया गया, तो भविष्य में मानव सभ्यता के सामने बड़ा संकट आ सकता है। वीरेंद्र/ईएमएस 19 मई 2026