नई दिल्ली,(ईएमएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महत्वपूर्ण संदेश साझा करते हुए कहा कि धरती माता संपूर्ण मानवता को एक परिवार मानती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धरती माता के लिए यह पूरा संसार एक घर की तरह है, जहाँ प्रत्येक संस्कृति का अपना महत्व और सम्मान है। यह विचार भारत की प्राचीन वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को प्रतिध्वनित करता है। यह संदेश न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, बल्कि एक इसतरह के विश्व की परिकल्पना भी प्रस्तुत करता है जहाँ मतभेदों के बावजूद सह-अस्तित्व और सम्मान का भाव बना रहे। पीएम मोदी ने इस संदर्भ में एक संस्कृत सुभाषित साझा किया: जनं बिभ्रती बहुधा विवाचसं नानाधर्माणं पृथिवी यथौकसम्। सहस्रं धारा द्रविणस्य मे दुहां ध्रुवेव धेनुरनपस्फुरन्ती॥ इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि विभिन्न भाषाएं बोलने वाले और अलग-अलग धर्मों व परंपराओं को मानने वाले लोगों को यह धरती माता एक ही घर के सदस्यों की तरह संरक्षित करती है। यह पृथ्वी हमारे लिए समृद्धि की हजारों धाराएं उसी तरह बहाए, जैसे कोई शांत और प्रेमपूर्ण गाय दूध देती है। प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश वैश्विक एकता, शांति और समावेशिता की भावना को बढ़ावा देता है। यह संदेश तब आया है जब विश्व विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है, और यह हमें साझा मूल्यों तथा परस्पर सम्मान के महत्व की याद दिलाता है। आशीष दुबे / 19 मई 2026