1 जून, 2026 से लागू हो सकता नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत और ओमान के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता अगले महीने की पहली तारीख, यानी 1 जून, 2026 से लागू हो सकता है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इसके संकेत दिए हैं, जिसमें सरकार की निर्यात-आधारित विकास को बढ़ावा देने और वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बीच आयात पर निर्भरता कम करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया। यह समझौता भारत के लिए कई बड़े आर्थिक और रणनीतिक फायदे लेकर आएगा, जिसमें 99 प्रतिशत भारतीय उत्पादों पर शून्य टैरिफ और होर्मुज जलसंधि के एक हिस्से पर ओमान के नियंत्रण से मिलने वाली सुरक्षा शामिल है। यह डील मुस्लिम देश ओमान के लिए वर्ष 2006 में अमेरिका के साथ हुए समझौते के बाद किसी देश के साथ पहला ऐसा बड़ा करार है। वहीं, भारत के लिए खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के किसी देश के साथ यह दूसरा समझौता है, इसके पहले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ ऐसी डील हुई थी। बीते साल दिसंबर में हस्ताक्षरित इस व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के तहत, ओमान भारत से निर्यात होने वाले लगभग 99.38 प्रतिशत उत्पादों पर कोई शुल्क नहीं लगाएगा। बदले में, भारत ने अपनी कुल टैरिफ लाइनों में से 77.79 प्रतिशत पर शुल्क में छूट की पेशकश की है, जो ओमान से आयात होने वाले 94.81 प्रतिशत सामान को कवर करती है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 10.5 अरब डॉलर तक पहुँच गया था, जिसमें भारत ने ओमान को 4.06 अरब डॉलर का माल निर्यात किया और ओमान से 6.5 अरब डॉलर का सामान आयात किया। यह समझौता केवल माल के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के सेवा क्षेत्र को भी इससे बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिसमें श्रमिकों की आवाजाही भी शामिल है। वर्तमान में पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों में करीब 6.75 लाख भारतीय रहते हैं। ओमान प्रति वर्ष लगभग 12.52 अरब डॉलर की सेवाओं का आयात करता है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी 5.31 प्रतिशत है। इस डील से भारत के रत्न एवं आभूषण, वस्त्र, चमड़ा, जूते, खेल के सामान, प्लास्टिक, फर्नीचर, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मा उत्पाद, चिकित्सा उपकरण और ऑटोमोबाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को पूर्ण टैरिफ-मुक्त पहुंच मिलेगी। यह समझौता भारत के आयुष या आयुर्वेदिक चिकित्सा क्षेत्र के लिए ओमान को एक नए बाजार के रूप में भी खोलता है। इसके बदले में, भारत ओमानी खजूर, संगमरमर और पेट्रोकेमिकल्स जैसे उत्पादों पर आयात शुल्क कम या समाप्त करेगा। इस समझौते का एक और महत्वपूर्ण पहलू होर्मुज जलसंधि पर ओमान का रणनीतिक नियंत्रण है। यह जलसंधि, जो वर्तमान में वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, केवल ईरान के नियंत्रण में नहीं है, बल्कि इसके दक्षिणी हिस्से पर ओमान का भी दबदबा है। चूंकि ओमान कच्चे तेल और एलएनजी का एक महत्वपूर्ण उत्पादक है और भारत उससे तेल तथा एलएनजी खरीदता है, इसके बाद मध्य पूर्व में किसी भी तनावपूर्ण स्थिति में भारत ओमान के बंदरगाहों के माध्यम से अपनी आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रख सकता है। यह डील ओमान को भारत के लिए एक वैकल्पिक समुद्री मार्ग, लॉजिस्टिक सपोर्ट और ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने वाले एक बड़े रणनीतिक साझेदार के रूप में स्थापित करती है, जिससे भारत की भू-राजनीतिक स्थिति मजबूत होगी। आशीष दुबे / 19 मई 2026