क्षेत्रीय
20-May-2026
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कोरबा (ईएमएस)। कोरबा जिलान्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में सिकल सेल और बाल मधुमेह, जन्मजात हृदय रोग और मातृ व शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने अब स्व-सहायता समूह की महिलाएं फ्रंटलाइन वारियर्स की भूमिका में नजर आएंगी। इसके लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने यूनिसेफ छत्तीसगढ़ व एमसीसीआर ट्रस्ट के सहयोग से सीईओ जिला पंचायत सभागार में स्व-सहायता समूह सदस्यों के लिए विशेष उन्मुखीकरण व जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। आयोजन के दौरान जो नई रणनीति तैयार की है, उसके तहत गांव-गांव में सक्रिय महिला नेटवर्क को अब कम्युनिटी हेल्थ एंबेसडर के रूप में बदला जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों में अत्यधिक प्यास लगना या अचानक वजन कम होना जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जो बाद में बाल मधुमेह का रूप ले लेते हैं, इसलिए कार्यशाला में शामिल स्व सहायता समूह के सदस्यों को विशेषज्ञों ने इन बीमारियों के साइलेंट लक्षणों को पहचानने की ट्रेनिंग दी है। ये महिलाएं गांव के हर घर तक पहुंचकर न सिर्फ सिकल सेल की नियमित जांच के लिए परिवारों को प्रेरित करेंगी, बल्कि जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को समय पर इलाज दिलाने में सेतु का काम करेंगी। गांव की महिलाएं खुद स्वास्थ्य की कमान संभालेंगी तो एनीमिया नियंत्रण, संस्थागत प्रसव और पूर्ण टीकाकरण जैसी योजनाओं को जमीनी स्तर पर शत-प्रतिशत सफलता मिलेगी। कार्यशाला को सफल बनाने में यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह और एमसीसीआर ट्रस्ट के डॉ. डी श्याम कुमार की टीम की मुख्य भूमिका रही। - 20 मई