प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द्वारा देश से की जा रही मन की बात के 131वें एपिसोड में गत 22 फ़रवरी 2026 को छात्रों से परीक्षा पे चर्चा की थी। अपने इस संवाद कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने छात्रों को दिये गये उपदेशों में कहा कि अंकों से किसी की योग्यता तय नहीं होती। शिक्षा जीवन को संवारने का एक माध्यम है, जबकि परीक्षा केवल आत्म-मूल्यांकन का ज़रिया है। उन्होंने छात्रों से परीक्षा को किसी बड़े बोझ या हौवे के रूप में देखने के बजाय इसे एक उत्सव की तरह मनाने की अपील की थी । पढ़ाई, आराम, शारीरिक खेलकूद और अपने शौक़ के बीच एक सही संतुलन बनाने को ज़रूरी बताया था। मोदी ने छात्रों को सलाह दी थी कि कुछ छात्र रात में पढ़ना पसंद करते हैं तो कुछ सुबह जल्दी, अपनी इसी मूल शैली पर विश्वास रखें। उन्होंने छात्रों को यह सलाह भी दी कि वे अपने मन की चिंताओं को अपने माता-पिता और परिवार के साथ खुलकर साझा करें, जिससे मानसिक तनाव कम होता है। अभिभावकों को सलाह देते हुये उन्होंने कहा था कि माता-पिता को बच्चों पर उनकी इच्छा के विरुद्ध विशिष्ट करियर चुनने का दबाव नहीं बनाना चाहिए। हर बच्चा अपने आप में अनूठा होता है। इसी तरह उन्होंने शिक्षकों को भी सलाह दी कि उन्हें छात्रों की सीखने की गति को समझना चाहिए और उनके लिए ऐसे लक्ष्य तय करने चाहिए जो पहुंच में हों लेकिन जिन्हें प्राप्त करने के लिए थोड़ी मेहनत करनी पड़े। प्रधानमंत्री के उपरोक्त कथन में यह बात पूरी तरह विरोधाभासी है कि अंकों से किसी की योग्यता तय नहीं होती। क्योंकि आज के दौर में एडमिशन,वरीयता सूची,श्रेणी निर्धारण,चयन आदि हर जगह अंक प्रतिशत की ही होड़ लगी हुई है। परन्तु प्रधानमंत्री ने इन्हीं छात्रों को कभी यह नहीं बताया कि यदि आपकी जी तोड़ मेहनतों के बाद परीक्षा के पर्चे लीक हो जायें व परीक्षा ही स्थगित कर दी जाये तो आख़िर छात्रों को ऐसे सदमे से कैसे उबरना चाहिये। और जो छात्र इस कुप्रबंधन का शिकार होकर किसी कारणवश पुनः परीक्षा में बैठने योग्य न रह सके और इसी कारण उसका जीवन व भविष्य चौपट हो जाये उस छात्र को उसके अभिभावकों को या फिर सरकार अथवा इस दुर्व्यवस्था के ज़िम्मेदारों को क्या करना चाहिये ? हालाँकि प्रधानमंत्री मोदी पेपर लीक के मुद्दे पर जुलाई 2024 में संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान अपना आधिकारिक बयान दे चुके है। उन्होंने संसद में देश के हर छात्र और नौजवान को भरोसा दिलाते हुए कहा था कि सरकार परीक्षाओं में होने वाली ऐसी गड़बड़ियों और पेपर लीक को रोकने के लिए अत्यंत गंभीर है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी थी कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी आरोपी या माफ़िया को क़तई बख़्शा नहीं जाएगा और उन्हें सख़्त से सख़्त सज़ा दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने परीक्षा प्रणाली और पूरे सिस्टम को पुख़्ता व पारदर्शी बनाने के लिए सरकार द्वारा युद्ध स्तर क़दम उठाने की बात कही थी। परन्तु आश्चर्य की बात तो यह है कि प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद भी पेपर लीक की घटना समाप्त नहीं हुई है। अभी इसी मई 2026 में आयोजित हुई नीट परीक्षा को पेपर लीक विवादों और धांधली की शिकायतों के बाद सरकार द्वारा रद्द कर दिया गया है और अब इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। इस परीक्षा में 22,05,035 छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। आज इन 22 लाख से अधिक छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। पेपर लीक और उसे रद्द किए जाने से उपजे मानसिक तनाव के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों से कम से कम 4 छात्रों द्वारा आत्महत्या करने की दुखद ख़बरें सामने आई हैं। इनमें एक छात्र प्रदीप मेघवाल (उम्र 22 वर्ष) राजस्थान के झुंझुनूं ज़िले का था जबकि ऋतिक मिश्रा (उम्र 21 वर्ष) उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी का निवासी था। यह ऋतिक का नीट परीक्षा का तीसरा प्रयास था और वे इस बार चयन को लेकर बेहद आश्वस्त था। परीक्षा रद्द होने की ख़बर से वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गया था। इसी तरह 20 वर्षीया अंशिका दिल्ली के आज़ादपुर (आदर्श नगर) इलाक़े की रहने वाली थी। जबकि 17 वर्षीय सिद्धांत हेगड़े दक्षिण गोवा के कर्टोरिम का रहने वाला था। हेगड़े पेपर लीक की घटना से इतना आहत था कि उसने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि वह अब और प्रतियोगी परीक्षाएं नहीं देना चाहता। एक तरफ़ तो नीट पेपर लीक के चलते 22 लाख से अधिक मेधावी छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है साथ ही देश में गत 10 वर्षों के दौरान भारत में लगभग एक लाख सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं। तो दूसरी तरफ़ लाखों रूपये ख़र्च कर अयोग्य व निठल्ले लोग डॉक्टर्स की फ़र्ज़ी डिग्री लेकर मरीज़ों की जान से खिलवाड़ करते फिर रहे हैं। पिछले दिनों भाजपा शासित राज्य मध्य प्रदेश के दमोह ज़िले से पुलिस ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चल रहे सरकारी संजीवनी क्लीनिकों में MBBS की फ़र्ज़ी डिग्री के आधार पर नौकरी कर रहे 3 नक़ली डॉक्टरों को गिरफ़्तार किया। ग्वालियर निवासी कुमार सानू शाक्य, देवेंद्र चौधरी और जबलपुर के पल्लव जैन ने गिरफ़्तारी के बाद पूछताछ में स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी MBBS की डिग्रियां और मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट 8,00,000 से 10,00,000 तक में ख़रीदे थे। दमोह के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा जब दस्तावेज़ों का वेरिफ़िकेशन कराया गया, तो डिग्री और रजिस्ट्रेशन नंबर पूरी तरह फ़र्ज़ी पाए गए। सवाल यह है कि जब नीट जैसी अति महत्वपूर्ण परीक्षा के इतिहास में अब तक 5 बार बड़े स्तर पर पेपर लीक और धांधली के गंभीर मामले सामने आ चुके हों जिनकी आधिकारिक जांच या अदालती कार्यवाही भी हुई हो। इसके अतिरिक्त पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग राज्यों में 70 से अधिक परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हों जिससे करोड़ों मेघावी छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है उधर 8 -10 लाख रुपये में डॉक्टरी की डिग्री हासिल की जा रही हो ऐसे में भारत में विद्या व विद्यार्थियों के भविष्य के बारे में आसानी से सोचा जा सकता है। ईएमएस / 20 मई 26