लेख
20-May-2026
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- सनातनी अब मांसाहारी और शाकाहारी में बंटे पश्चिम बंगाल की सरकार के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंत्रिमंडल की बैठक में पश्चिम बंगाल के इमाम और पुजारियों को जो भत्ता ममता सरकार द्वारा दिया जा रहा था, 1 जून 2026 से दोनों के भत्ते बंद करने का निर्णय किया है। इस निर्णय की पश्चिम बंगाल में बड़ी तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। टीएमसी के कार्यकाल में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसी साल मार्च माह से धार्मिक नेताओं के भत्ते में 500 रूपये प्रतिमाह की वृद्धि की थी। पश्चिम बंगाल में मस्जिदों के इमाम को हर महीने 3000 रूपये तथा पुजारियों को 2000 रूपये की मदद दी जा रही थी। भाजपा की सरकार ने अब यह मानदेय बंद करने का निर्णय लिया है। इसका असर संपूर्ण पश्चिम बंगाल में हिन्दू-मुस्लिम के बीच होना तय है। पश्चिम बंगाल में काली की पूजा होती है। पश्चिम बंगाल में पूजा में बली और खाने-पीने में मांसाहार का बड़ा उपयोग होता है। बंगाल में हजारों की संख्या में पुजारियों को यह मानदेय मिल रहा था। पुजारियों को आशा थी, नई सरकार इमाम और मुअज्जीन का भत्ता बंद करेगी। हिंदू पुजारियों को 3000 रूपये महीने का मानदेय देने का निर्णय करेगी। सरकार ने दोनों समुदाओं के धार्मिक गुरुओं का भत्ता बंद कर दिया है। पश्चिम बंगाल से जो खबरें आ रही हैं, उसके अनुसार पश्चिम बंगाल में हिंदुओं को दो अलग-अलग भागों में बांटा जा रहा है। हजारों वर्ष पूर्व हिंदुओं में वैष्णव और शेव शाक्त के बीच में विवाद होते रहे हैं। हिन्दू समुदाय तीन भागों में बटे हुए थे। शुभेंदु सरकार ने पश्चिम बंगाल में इसी विवाद को फिर से खड़ा कर दिया है। भाजपा ने पश्चिम बंगाल का चुनाव हिंदुओं के नाम पर लड़ा है। हिंदू पुजारियों को आशा थी, उनका मानदेय बढ़ाया जाएगा। सरकार ने बढ़ाने के स्थान पर बंद कर दिया है। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी जय श्री राम के उद्घोष के साथ वहां पहुंची है। बड़ी संख्या में उत्तर भारत के लोग पश्चिम बंगाल में रह रहे हैं। सरकार के इस निर्णय से बंगाली पुजारियों में जबरदस्त नाराजी देखने को मिल रही है। उनका मानना है वह शाक्त भक्त हैं, मां काली की पूजा करते हैं। काली की तांत्रिक पूजा अलग तरह की होती है, जिसे वैष्णव और शैव स्वीकार नहीं करते हैं। पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की सरकार बनने के बाद सरकार, पश्चिम बंगाल के पुजारियों के साथ हिन्दुओं में जो भेदभाव कर रही है। उससे यह धारणा बन रही है, पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी की सरकार हिंदुओं को हिंदुओं के बीच में बांटने का काम कर रही है। पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है। प्रारंभ में ही यदि इस तरह के भेदभाव की भावना हिंदुओं के बीच में जागृत होती है, तो यह हिंदू एकता को लेकर भाजपा को नुकसान पहुंचा सकती है। चुनाव प्रचार के दौरान यह मामला कहीं ना कहीं सामने आया था। उत्तर भारत के जो नेता पश्चिम बंगाल के चुनाव प्रचार में गए थे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से मांस और मछली खाकर यह विश्वास दिलाया था, वह बंगाल की संस्कृति और बंगाल की धार्मिक परंपरा के साथ कोई अन्याय नहीं करेंगे। सरकार बनने के बाद जिस तरह से कालीभक्त पुजारियों के मानदेय को सरकार ने बंद किया है। उसके बाद वहां पर कहा जा रहा है, वर्तमान सरकार काली भक्तों को पसंद नहीं करती है। पश्चिम बंगाल की धार्मिक संस्कृति में भगवान राम और अन्य हिंदू देवी देवता जो शैव और वैष्णव संप्रदाय से आते हैं, उन्हें पश्चिम बंगाल में साक्त भक्तों में स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। पश्चिम बंगाल में जिस तरह से चुनाव हुए हैं। लाखों की संख्या में अर्ध सैनिक बल तैनात किया गया। लगभग एक करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए। पश्चिम बंगाल के बाहर से अधिकारियों को लाकर चुनाव कार्य में लगाया गया। दो तिहाई बहुमत से जीतने के बाद भी भाजपा को वह जन समर्थन बंगाल में अभी नहीं मिल रहा है, जो इतनी बड़ी जीत के बाद भाजपा को मिलना चाहिए था। जिस तरह का निर्णय सुवेंदु अधिकारी ने लिया है, उसमें हिंदुओं के मन में यदि यह बात आ गई, तो भाजपा को राजनीतिक तौर पर इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। भारतीय जनता पार्टी की मुसलमानों से अपनी दूरियां जग जाहिर हैं। यदि वह इमाम और मुअज्जिन के भत्ते को बंद कर देती, तो इसकी प्रतिक्रिया हिंदुओं के बीच बेहतर होती। सरकार ने यह निर्णय नहीं किया, जिसके कारण पश्चिम बंगाल में हिंदुओं के बीच विभाजन की बात अब खुले आम होने लगी है। जो पश्चिम बंगाल की सरकार और भाजपा के लिए आने वाले समय पर नुकसानदेह साबित हो सकती है। पश्चिम बंगाल में भाजपा की जो जीत हुई है उससे लगता है, भाजपा के नेता सत्ता के नशे में मदहोश हो चुके हैं। निर्णय लेते वक्त वह सोच समझकर निर्णय नहीं ले रहे हैं। जोश में होश खोने के स्थान पर पश्चिम बंगाल सरकार को ज्यादा सतर्कता से काम करना होगा, यही कहा जा सकता है। ईएमएस / 20 मई 26