वॉशिंगटन (ईएमएस)। रात के समय आसमान में दिखाई देने वाले तारामंडल आखिर क्या होते हैं और वैज्ञानिक इनका इस्तेमाल कैसे करते हैं, यह सवाल हरेक के मन होता है। इस बारे में अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने स्पेस प्लेस पोर्टल पर विस्तार से जानकारी साझा की है। वैज्ञानिकों के अनुसार तारामंडल तारों के ऐसे समूह होते हैं, जो पृथ्वी से देखने पर किसी खास आकृति या चित्र जैसे दिखाई देते हैं। ये तारे वास्तव में आपस में जुड़े नहीं होते, बल्कि अंतरिक्ष में अलग-अलग दूरी पर स्थित होते हैं। हालांकि पृथ्वी से देखने पर ये जानवरों, इंसानों या वस्तुओं जैसी आकृतियां बनाते नजर आते हैं। प्राचीन समय से ही अलग-अलग सभ्यताओं और संस्कृतियों ने इन तारों के समूहों को अलग-अलग नाम दिए थे। आधुनिक खगोल विज्ञान में आज कुल 88 तारामंडलों को आधिकारिक मान्यता प्राप्त है। वैज्ञानिक बताते हैं कि रात के आसमान में दिखाई देने वाले तारामंडल पृथ्वी पर आपकी स्थिति और मौसम के अनुसार बदलते रहते हैं। पृथ्वी सूर्य के चारों ओर लगातार चक्कर लगाती है, इसलिए हर मौसम में रात का आकाश अलग दिखाई देता है। उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में भी अलग-अलग तारामंडल दिखाई देते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक तारामंडल सिर्फ देखने में सुंदर नहीं होते, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरिक्ष अध्ययन में भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अंतरिक्ष वैज्ञानिक इन्हें आकाश में स्थायी निशान या लैंडमार्क की तरह इस्तेमाल करते हैं। नासा और अन्य खगोल वैज्ञानिक तारों, नीहारिकाओं और दूसरी खगोलीय वस्तुओं के नाम भी उन्हीं तारामंडलों के आधार पर रखते हैं, जिनमें वे स्थित होते हैं। उदाहरण के तौर पर हर साल अक्टूबर महीने में दिखाई देने वाली ‘ओरियोनिड्स’ उल्का वर्षा ‘ओरियन’ तारामंडल की दिशा से आती हुई दिखाई देती है। इसी वजह से उसका नाम भी उसी तारामंडल पर रखा गया है। सदियों पहले समुद्री नाविक दिशा पता करने के लिए तारों और तारामंडलों का इस्तेमाल करते थे, जिसे ‘सेलेस्टियल नेविगेशन’ कहा जाता है। आज भी अंतरिक्ष यात्रियों को इस तकनीक की ट्रेनिंग दी जाती है ताकि किसी आपात स्थिति में वे तारों की मदद से दिशा पहचान सकें। वैज्ञानिकों के अनुसार आधुनिक रोबोटिक अंतरिक्ष यान भी तारों के नक्शे का उपयोग करते हैं। इन यानों के कंप्यूटर में तारों का पूरा मैप मौजूद रहता है और कैमरों से ली गई तस्वीरों की तुलना करके वे अंतरिक्ष में अपनी स्थिति और दिशा तय करते हैं। सुदामा/ईएमएस 21 मई 2026