क्षेत्रीय
21-May-2026
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- मधुमक्खियां साझेदारी का सम्मान करती है उज्जैन (ईएमएस)। प्रो डा अर्पण भारद्वाज कुलगुरु सम्राट विक्रमादित्य विवि उज्जैन ने अपने सारगर्भित शुभकामना संदेश देते हुए प्रो डा धर्मेंद्र मेहता निदेशक पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान को इस विश्व मधुमक्खी दिवस प्रसंग अनूठे आयोजन हेतु बधाई देते हुए बताया कि मधुमक्खियों में लगभग 170 गंध ग्राही होते हैं, जिससे उनकी सूंघने की क्षमता कुत्तों से कहीं अधिक मजबूत होती है। उनके एंटीना सैकड़ों स्वाद ग्राही से भरे होते हैं, जो उन्हें फूलों, भोजन के स्रोतों और यहां तक ​​कि खतरे को भी उल्लेखनीय सटीकता के साथ पहचानने में मदद करते हैं। *परागण जीवन का संरक्षण: विश्व मधुमक्खी दिवस आयोजन प्रो भारद्वाज कुलगुरु सम्राट विक्रमादित्य विवि उज्जैन विश्व मधुमक्खी दिवस के अवसर पर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंधन संस्थान में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और खाद्य सुरक्षा में मधुमक्खियों की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी है कुलगुरु सम्राट विक्रमादित्य विवि उज्जैन प्रो डा अर्पण भारद्वाज ने कहा कि मधुमक्खियां केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि परागण (पॉलिनेशन) के माध्यम से कृषि और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रकृति संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। निदेशक एवं प्रबंधन संकायाध्यक्ष प्रो. डॉ. धर्मेन्द्र मेहता ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मधुमक्खियाँ देखने में भले ही छोटी हों, लेकिन वास्तव में उनकी पाँच आँखें होती हैं। दो बड़ी संयुक्त आँखें उन्हें अपने आसपास की दुनिया को देखने में मदद करती हैं, जबकि उनके सिर के ऊपर स्थित तीन छोटी आँखें प्रकाश का पता लगाने और दिशा का मार्गदर्शन करने में सहायक होती हैं।मधुमक्खियों का संरक्षण सीधे तौर पर मानव जीवन और खाद्य श्रृंखला से जुड़ा हुआ है। इनके बिना फसलों की उत्पादकता और जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों द्वारा संयुक्त राष्ट्र संपोषणीय विकास लक्ष्यों पर आधारित अपने रोचक अनुभवो को साझा करते हुए कहा कि विश्व स्तर पर संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा इस दिवस को मनाने का उद्देश्य मधुमक्खियों और अन्य परागणकर्ताओं के संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करना है। मानव संसाधन कि व्याख्याता डॉ. नयनतारा डामोर ने मधुमक्खियों की घटती संख्या को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए पर्यावरण के अनुकूल उपाय अपनाने पर जोर दिया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता बनाए रखने तथा मधुमक्खियों के संरक्षण के लिए जागरूक रहने की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम में विभाग के सभी कर्मचारीगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना और सतत विकास के लिए जिम्मेदार व्यवहार को प्रोत्साहित करना रहा। ईएमएस / 21/05/2026