:: कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों को सिखाया जाएगा एआई का कौशल :: :: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा; शिक्षा घर योजना को दी सैद्धांतिक सहमति :: भोपाल/इंदौर (ईएमएस)। मध्य प्रदेश की नई पीढ़ी को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और अपनी गौरवशाली संस्कृति से परिचित कराने के लिए राज्य सरकार ने स्कूली शिक्षा के ढांचे में बड़े बदलावों की तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में उज्जैन के प्रतापी सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। इसके साथ ही, गुरु सांदीपनि के आदर्श जीवन पर भी एक विशेष और रोचक पुस्तक तैयार की जाए। मुख्यमंत्री ने यह निर्देश गुरुवार को मंत्रालय में स्कूल शिक्षा विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित थे। आधुनिक वैश्विक आवश्यकताओं को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि स्कूली शिक्षा के अंतर्गत कक्षा 8वीं से 12वीं तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई - आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के कौशल को पाठ्यक्रम से जोड़ने के लिए एक प्रभावी कार्य योजना तैयार की जाए। उन्होंने नए सत्र की तैयारियों को लेकर कड़े निर्देश देते हुए कहा कि 16 जून से प्रारंभ हो रहे शैक्षणिक सत्र से पहले सभी पूर्व तैयारियां पूरी कर ली जाएं तथा अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया 1 जुलाई से पहले अनिवार्य रूप से संपन्न हो। :: पहली बार एक साथ दिखेंगे दो बड़े विभाग :: प्रदेश के इतिहास में पहली बार एक अभिनव प्रयोग होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर अब स्कूल शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग नन्हें बच्चों की गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के लिए संयुक्त रूप से मिलकर काम करेंगे। इसके अलावा, जिन हाईस्कूलों के समीप हायर सेकेंडरी स्कूल उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें चिन्हित कर प्रोन्नत (अपग्रेड) करने का प्रस्ताव भी तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने आंशिक रूप से जीर्ण-शीर्ण हो चुके शासकीय विद्यालयों की तत्काल मरम्मत और सभी स्कूलों में बाउंड्री वॉल बनाने के निर्देश दिए। :: शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम देने वाले शिक्षक होंगे सम्मानित :: समीक्षा बैठक में बताया गया कि प्रदेश की 26 शासकीय शालाओं ने इस वर्ष शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम देकर कीर्तिमान रचा है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इन विद्यालयों के शिक्षकों का सार्वजनिक रूप से सम्मान किया जाएगा। साथ ही, 90 से 95 प्रतिशत से अधिक परिणाम देने वाली शालाओं को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जिला शिक्षा अधिकारियों को स्थानीय विधायकों के साथ समन्वय कर विधानसभा स्तर पर स्कूलों की व्यवस्थाएं सुधारने और पूर्व छात्र सम्मेलनों (एलुमनाई मीट) के आयोजन पर जोर दिया, ताकि पुराने विद्यार्थी शाला के विकास में योगदान दे सकें। :: रोजगारपरक होगा प्रशिक्षण, होगी पास आउट छात्रों की ट्रैकिंग :: अब शासकीय स्कूलों में केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि व्यावसायिक और रोजगारपरक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी कक्षाओं में कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे पाठ्यक्रमों का समावेश होगा। मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्देश देते हुए कहा कि शासकीय स्कूलों से 12वीं उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थी आगे उच्च शिक्षा, रोजगार, कौशल प्रशिक्षण या पैतृक व्यवसाय में से किस क्षेत्र में जा रहे हैं, इसकी डेटाबेस ट्रैकिंग की जाए। इससे युवाओं के भविष्य निर्धारण के लिए सरकार के पास एक प्रामाणिक डेटा उपलब्ध रहेगा। :: शासकीय स्कूलों में बढ़ा रुझान, पहली कक्षा में दाखिले 32% बढ़े :: बैठक में सचिव स्कूल शिक्षा ने विभाग की बड़ी उपलब्धियां साझा कीं। सरकार के प्रयासों से वर्ष 2024-25 की तुलना में वर्ष 2025-26 में शासकीय विद्यालयों की कक्षा-1 में नामांकन (एडमिशन) दर में रिकॉर्ड 32.4 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, कक्षा 9वीं से 12वीं के नामांकन में भी 4.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। :: पढ़ाई छोड़ने वालों को सहारा देगी शिक्षा घर योजना :: बैठक के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तावित नई शिक्षा घर योजना के प्रस्तुतिकरण को मुख्यमंत्री ने खूब सराहा और इसकी सैद्धांतिक स्वीकृति दी। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत किन्हीं कारणों से कक्षा 8वीं या उसके बाद पढ़ाई छोड़ चुके (ड्रॉपआउट) किशोर-किशोरियों और युवाओं को पुनः हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा उत्तीर्ण करने का सुनहरा अवसर मिलेगा। मध्य प्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा संचालित की जाने वाली यह योजना प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में लागू होगी। प्रकाश/21 मई 2026