23-May-2026
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- सरकार और डीजीपी से मांगी रिपोर्ट - सुनवाई आगामी 8 जून को रांची (ईएमएस)। झारखंड उच्च न्यायालय ने बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल के अधीक्षक द्वारा एक महिला कैदी के कथित यौन शोषण की खबर पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अवकाशकालीन खंडपीठ ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया है। अदालत ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को इस पूरे मुद्दे पर एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा को हलफनामा दायर कर जांच के लिए अब तक उठाए गए कदमों से अदालत को अवगत कराने का आदेश दिया गया है। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि जहाँ कैदियों के कल्याण के रक्षक पर ही यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगे हों, वहाँ राज्य को यह स्पष्ट करना होगा कि सच्चाई का पता लगाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। मामले में यह बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है कि जेल अधीक्षक के कथित यौन शोषण के कारण महिला कैदी गर्भवती हो गई थी और बाद में उसका गर्भपात कराने का भी प्रयास किया गया। यही नहीं, न्यायालय ने इस बात पर भी गौर किया कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इस संवेदनशील घटना को दबाने की कोशिश के भी गंभीर आरोप हैं। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि आरोपी जेल अधीक्षक के खिलाफ लगे इन संगीन आरोपों की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक तीन सदस्यीय विशेष समिति का गठन कर दिया गया है। इसके अलावा, मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रुति सोरेन के नेतृत्व में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) की एक टीम को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उच्च न्यायालय अब इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई आगामी 8 जून को करेगा। - ईएमएस 23 मई 2026