-विभिन्न जिलों की 20 सड़कों पर 1147 करोड़ रुपए की लागत से शुरू होगा काम गांधीनगर (ईएमएस)| गुजरात की सड़कों को आधुनिक बनाकर पर्यावरण के अनुकूल टिकाऊ विकास की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘स्पीड और स्केल’ के विजन के अनुसार भारत के सड़क नेटवर्क के विकास की गति और उसके स्केल में परिवर्तन स्पष्ट दिखाई दे रहा है। इस विजन के अनुरूप राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में इस वर्ष के बजट में 1147 करोड़ रुपए की लागत से सड़कों के निर्माण में क्लाइमेट रेजिलिएंट और नई टेक्नोलॉजी के उपयोग का प्रावधान किया गया है। इसके अनुसार, राज्य के विभिन्न जिलों में 20 सड़कों पर इस ग्रीन टेक्नोलॉजी की मदद से काम शुरू होने जा रहा है। इस प्रक्रिया में मौजूदा सड़कों के पुराने मटीरियल का दोबारा इस्तेमाल करके सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिससे न केवल लागत में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल प्रक्रिया को प्रोत्साहन भी मिलेगा। राज्य की इन सड़कों पर ग्रीन टेक्नोलॉजी के अनुसार होगा काम लणवा-मणुंद-संडेर-बालीसाणा रोड (पाटण), राधनपुर-मशाली-माधापुरा रोड (पाटण), भीड़िया सोमनाथ रोड (गिर सोमनाथ), संतरामपुर-झालोद रोड (महिसागर), दयादरा-नबीपुर-झनोर रोड (भरूच), इलाव-कोसंबा रोड (भरूच), मोरबी-नानी वावड़ी-बगथळा रोड (मोरबी), सुरेन्द्रनगर बाईपास रोड (सुरेन्द्रनगर), डिंडोली-करड़वा-इकलेरा रोड (सूरत), मांगलेज-नारेश्वर रोड (वडोदरा), कोसिंद्रा-भाखा रोड (छोटा उदेपुर), करजण-आमोद रोड (वडोदरा), इसरवाड़ा-उंदेल रोड (आणंद), वालम-कड़ी रोड (मेहसाणा), पेपळु-कापरा रोड (मेहसाणा), लुणी-गुंदाला-पत्री-टप्पर-बाबिया रोड (कच्छ), वड़ताल-जोळ-बाकरोल रोड (आणंद), तळाजा-गोपनाथ रोड (भावनगर), कालावड़-जामवंथली-फल्ला रोड (जामनगर) और कोठारा एप्रोच रोड (नर्मदा)। इन सड़कों पर अलग-अलग सड़कों की जरूरत के मुताबिक सड़क चौड़ीकरण का काम, आरसीसी गटरलाइन, रीसर्फेसिंग, प्रोटेक्शन वर्क, फोरलेन, मिट्टी काम, रंबल स्ट्रिप, रोड फर्नीचर, साइड शोल्डर, व्हाइट टॉपिंग और ग्लास ग्रिड जैसे कार्य किए जाएंगे। इन सड़कों पर पर्यावरण के अनुकूल (क्लाइमेट रेजिलिएंट) और नई टेक्नोलॉजी के अनुसार काम किया जाएगा। ग्रीन टेक्नोलॉजी के काम में मौजूदा सड़क की पुरानी सामग्री का उपयोग किया जाता है। इसमें सड़क को उखाड़कर वहां चूना बिछाया जाता है। इस सामग्री को पीसकर (चूरा) करके उस पर रोलर का इस्तेमाल करके स्थिर किया जाता है। उसके बाद, उखाड़ी गई पुरानी सड़क की सामग्री को इस सतह पर बिछाकर ड्राई रोलिंग किया जाता है। उसके बाद, उस पर सीमेंट स्प्रेडर मशीन से सीमेंट बिछाकर उस पर केमिकल युक्त सीमेंट का स्टेबिलाइजेशन किया जाता है। उसके बाद, पैड फुट रोलर, ग्रेडर और न्यूमेटिक टायर रोलर से उसका लेवलिंग ओर कॉम्पेक्शन किया जाता है। इस कार्य के सात दिनों के बाद नॉन वूवन मटीरियल-स्ट्रेस एब्जॉर्बिंग मेंब्रेन (एसएएमआई) बिछाकर उस पर डामर की परत लगाई जाती है। एसएएमआई एक प्रकार की हाई-टेक फाइबर शीट होती है, जिसे डामर बिछाने से पहले लगाया जाता है। यह दरारों को सतह तक पहुंचने से रोकती है, गाड़ियों के दबाव को अवशोषित करने में सहायक होती है और सड़क की उम्र बढ़ाती है। इस टेक्नोलॉजी में पुराने पेवमेंट की मिट्टी तथा मेटल जैसे मटीरियल का दोबारा उपयोग किया जाता है। इससे लागत कम होती है और सड़क का बेस मजबूत होता है। इस टेक्नोलॉजी की मदद से सड़क को लंबे समय तक टिकाए रखने के लिए आवश्यक बेस को बेहतर बनाया जाता है, जिससे सड़क की मजबूती बढ़ती है और उस पर बार-बार मरम्मत कार्य करने की जरूरत भी कम पड़ती है। इस कार्य से कार्बन उत्सर्जन में कमी होने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों की बचत भी होती है। भरूच में जंबूसर-टंकाली-देवला रोड पर 50 करोड़ रुपए के खर्च से ग्रीन टेक्नोलॉजी का उपयोग करके रिकंस्ट्रक्शन की मंजूरी दी गई है। यह सड़क जंबूसर के निकट फार्मास्युटिकल बल्क ड्रग पार्क को जोड़ती है, साथ ही ओएनजीसी प्लांट को जोड़ने वाली मुख्य सड़क है। इसके अलावा, यह सड़क देवला के पास नमक की खेती वाले क्षेत्र को भी संपर्क प्रदान करती है। यहां समुद्री तट के पास झिंगा पालन के तालाबों के लिए भी यह सड़क जंबूसर को वडोदरा जिले से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण राज्य हाईवे है। इस कारण यह वडोदरा से रेलवे, एयरपोर्ट और एक्सप्रेस-वे के माध्यम से देश के अन्य हिस्सों के साथ सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करता है। इस प्रकार, विभिन्न इकाइयों को सीधी कनेक्टिविटी मिलने से औद्योगिक दृष्टि से इस सड़क से बहुत लाभ होगा। जियोग्रिड और ग्लास ग्रिड : पॉलिमर की जाली (ग्रिड) और फाइबर ग्लास की ग्रिड बिछाकर मजबूत सड़क बनाई जाती है। जियोग्रिड नरम मिट्टी में ज्यादा मददगार होता है। सड़क के भार को वितरित करने में मदद करता है। ग्लास ग्रिड डामर की परत के बीच बिछाया जाता है, जो सड़क की उम्र बढ़ाता है और मजबूती देता है। कोल्ड मिक्स एस्फाल्ट : बिना गर्म किए डामर मिक्स का उपयोग मानसून के समय में भी काम करने में उपयोगी साबित होता है। सीमेंट स्टेबिलाइजेशन : सड़क के बेस या मिट्टी में सीमेंट मिलाकर एक मजबूत परत बनाई जाती है। फ्लाई ऐश : थर्मल पावर प्लांट के कोयले के पाउडर का उपयोग सड़क निर्माण में किया जाता है।इंटरलॉकिंग पेवर्स : छोटे कंक्रीट ब्लॉक्स को एक-दूसरे के साथ लॉक करके बिछाया जाता है। पैनल्ड कंक्रीट : एक साथ लंबी सड़क बनाने के बजाय कंक्रीट के अलग-अलग स्लैब बिछाकर सड़क का निर्माण। पर्पेच्युअल पेवमेंट : बहुत सारी परतों के साथ एक मजबूत सड़क का निर्माण। इस सड़क का मरम्मत खर्च कम रहता है और सड़क लंबे समय तक चलती है। - 23 मई