नई दिल्ली (ईएमएस)। केंद्र सरकार ने पेट्रोल पंपों और गैस स्टेशनों पर उपभोक्ताओं को सही मात्रा में ईंधन सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब सरकारी मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र (जीएटीसी) इन वितरण मशीनों की जांच कर उनकी सटीकता की पुष्टि करेंगे। केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल के साथ-साथ सीएनजी, एलपीजी, एनएनजी और भविष्य के ईंधन हाइड्रोजन डिस्पेंसरों की सटीक माप सुनिश्चित करने के लिए कानूनी माप विज्ञान नियमों में संशोधन किया है। इस बदलाव के बाद, अब सरकारी मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्र इन सभी ईंधन वितरण मशीनों की जांच करेंगे, जिससे उपभोक्ताओं को मिलने वाली मात्रा में पारदर्शिता और सटीकता बढ़ेगी। पहले जीएटीसी केवल 18 प्रकार के उपकरणों की जांच करते थे, लेकिन पांच नए ईंधन वितरण तंत्रों को शामिल करने के बाद यह संख्या बढ़कर 23 हो गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ईंधन वितरण में धोखाधड़ी पर अंकुश लगाना, राज्यों के विभागों पर बढ़ते दबाव को कम करना और स्वच्छ ईंधन के बढ़ते चलन के बीच उपभोक्ताओं के हितों की बेहतर सुरक्षा करना है। नए नियमों के तहत पेट्रोल-डीजल डिस्पेंसर की जांच के लिए प्रति नोजल 5 हजार रुपये और अन्य ईंधन के लिए 10 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। इससे निजी प्रयोगशालाओं की भागीदारी बढ़ेगी और जांच प्रक्रिया में तेजी व दक्षता आने की उम्मीद है। सतीश मोरे/25मई ---