क्षेत्रीय
25-May-2026


सारंगपुर (ईएमएस)। विहाररत जैन साधु-संतों एवं आर्यिका माताओं के साथ लगातार हो रही दुर्घटनाओं और अमानवीय घटनाओं के विरोध में सोमवार को स्थानीय सकल जैन समाज के तत्वावधान में नगर में मौन रैली निकाली गई। मौन रैली का शुभारंभ महावीर अतिशय क्षेत्र बड़ा मंदिर से हुआ। रैली भेरू दरवाजा एवं बस स्टैंड मार्ग से होते हुए तहसील कार्यालय पहुंची, जहां प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन तहसीलदार आकाश शर्मा को सौंपा गया। ज्ञापन में जैन साधु-संतों की सुरक्षा हेतु विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू करने, राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाने तथा रीवा दुर्घटना प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई। समाजजनों ने कहा कि हाल ही में रीवा के समीप पैदल विहार कर रही आर्यिकाओं को एक कार द्वारा टक्कर मारने की घटना में दो आर्यिका माताओं का समाधि मरण हो जाने तथा एक आर्यिका माताजी के गंभीर रूप से घायल होने से जैन समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। विहाररत पूज्य आर्यिका श्रुतमती माताजी एवं उपशमती माताजी के साथ हुई यह दुखद घटना केवल सामान्य सड़क दुर्घटना प्रतीत नहीं होती। उपलब्ध तथ्यों, वीडियो क्लिप एवं परिस्थितियों के आधार पर समाज में गहरी चिंता और आशंका का वातावरण निर्मित हुआ है, इसलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय जांच अत्यंत आवश्यक है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि जैन साधु-संत पूर्णतः निहत्थे, अहिंसक एवं पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं, जो समाज में शांति, संयम, करुणा और अहिंसा का संदेश देते हैं। ऐसे संतों के साथ बढ़ती दुर्घटनाएं और हमले समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उच्चस्तरीय जांच की मांग सकल जैन समाज ने मांग की कि घटना की एसआईटी अथवा न्यायिक जांच कराई जाए। घटना से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो एवं डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए तथा दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि जांच में किसी सुनियोजित षड्यंत्र के तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि विहाररत संतों के लिए प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक तथा हाईवे एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही भारत सरकार द्वारा पैदल विहार करने वाले संतों के लिए राष्ट्रीय गाइडलाइन एवं सुरक्षा एसओपी तैयार करने की भी मांग उठाई गई।ज्ञापन मे कहा कि साधु-संत आत्मरक्षा नहीं करते और किसी प्रकार के सुरक्षा साधनों का उपयोग नहीं करते, इसलिए उनके विरुद्ध होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखा जाना चाहिए। स्थानीय स्तर पर “संत सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन सेल” एवं आपातकालीन संपर्क व्यवस्था स्थापित करने की भी मांग की गई। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि जैन समाज सदैव शांति, अहिंसा, कानून एवं संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास रखता है। समाज का उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना एवं तपस्वी संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ज्ञापन देने में सकल जैन समाज अध्यक्ष नरेंद्र जैन,सकल जैन समाज पूर्व अध्यक्ष निर्मल जैन, सकल दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष मनोज जैन, श्वेतांबर मूर्ति पूजा संघ अध्यक्ष प्रदीप बरडिया, सकल जैन समाज महामंत्री अरविंद चौधरी, कोषाध्यक्ष अनिल जैन, दीपक जैन, विवेक जैन,दिगम्बर जैन समाज पूर्व अध्यक्ष विजय जैन,महावीर दिगम्बर जैन मंदिर अध्यक्ष निर्मल जैन, लतेश सिंघई,चंद्रकुमार जैन,दिनेश लोढ़ा,विजय बरडिया,अजय जैन,सुधीर श्रीमाल,सुबोध श्रीमाल,दिलीप श्रीमाल,विपिन जैन,संजय जैन डैडी,सुरेश जैन,अरुण जैन,वीरेंद्र बरडिया,दिलीप जैन, पारस जैन,वर्धमान सिंघई,शांतिलाल जैन, जैनपाल जैन,गुणधर जैन,मनोज पांदा,दीपेश जैन,निर्मल जैन मेडिकल,संजय जैन,अभिषेक पारख सौरभ जैन शैलेन्द्र जैन ,आशीष जैन,जयकुमार जैन, पंकज जैन,वैभव जैन,महिलाओं में आशा जैन, नीरा जैन,श्वेता जैन,अर्पिता जैन, अर्चना जैन,श्वेता सिंघई,किरण जैन,रेखा जैन,सीमा जैन मनीषा जैन ममता जैन,अनुपमा जैन,साधना जैन,निर्मला जैन, मीना जैन सहित बड़ी संख्या में महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित थे। नरेन्द्र जैन / 25 मई 26