तेहरान,(ईएमएस)। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने रविवार को दावा किया कि उसने अपने क्षेत्रीय जलक्षेत्र में दाखिल हुए एक अमेरिकी एमक्यू-1 ड्रोन को वायु रक्षा मिसाइलों की मदद से मार गिराया है। आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में कोई भी जहाज उनकी अनुमति के बिना आवाजाही नहीं कर सकता। ईरान ने इससे पहले एक अमेरिकी एमक्यू-9 ड्रोन को भी गिराने और अपने हवाई क्षेत्र में घुसे एक लड़ाकू विमान पर फायरिंग करने का दावा किया था। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच युद्धविराम की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन ईरान का कहना है कि अमेरिका द्वारा इसका उल्लंघन किए जाने पर उसे जवाबी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा है। सेंटकॉम के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स के अनुसार, अमेरिकी बलों ने दक्षिणी ईरान में आत्मरक्षा के तहत कार्रवाई की है। अमेरिका का दावा है कि उसने ईरान की तरफ जा रहे एक जहाज पर हेलफायर मिसाइल से हमला किया और उन ईरानी नौकाओं को निशाना बनाया जो समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रही थीं। इसके अलावा अमेरिकी सेना ने मिसाइल लॉन्च साइटों और एक सैन्य ठिकाने पर भी हमले किए हैं। वॉशिंगटन ने इन हमलों को पूरी तरह रक्षात्मक बताते हुए कहा कि यह कार्रवाई क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिकों और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए जरूरी थी, और दोनों देशों के बीच युद्धविराम अभी भी कायम माना जा रहा है। इस सैन्य टकराव के बीच ईरान के रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बंदर अब्बास बंदरगाह शहर के पूर्वी इलाके में तेज धमाकों की आवाजें भी सुनी गई हैं। आईआरजीसी नेवी ने कड़े तेवर अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के प्रबंधन में किसी भी तरह का दखल देने की कोशिश की, तो उसे गंभीर सैन्य परिणाम भुगतने होंगे। समुद्री रेडियो चैनल के जरिए फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में चल रहे जहाजों को संदेश भेजा गया है कि फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखा गया है। वहां से गुजरने की अनुमति केवल आईआरजीसी नेवी की मंजूरी और तय रास्तों के जरिए ही दी जाएगी। ईरान ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, क्योंकि इससे समुद्री सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। वीरेंद्र/ईएमएस/31मई 2026