राष्ट्रीय
31-May-2026


प्रयागराज,(ईएमएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में 16 वर्षीय रेप पीड़िता को गर्भपात कराने की इजाजत दे दी है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी महिला को अपने शरीर और प्रजनन संबंधी निर्णय लेने का पूरा अधिकार है, इस भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त जीवन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता के अधिकार का अभिन्न अंग माना जाना चाहिए। मामले की सुनवाई के दौरान, विशेष लोक अभियोजक सविता पाठक ने पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में सामने आया कि पीड़िता करीब सात सप्ताह की जुड़वा बच्चों की गर्भावस्था से गुजर रही थी, जिसमें 19 मार्च को प्रयागराज के महिला अस्पताल में हुए अल्ट्रासाउंड में दोनों भ्रूण जीवित पाए गए थे। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंजू कनौजिया की पीठ ने सुनवाई कर महिलाओं की शारीरिक स्वायत्तता और प्रजनन संबंधी निर्णयों के सम्मान पर जोर दिया। इलाहाबाद की अदालत ने आदेश में कहा कि नाबालिगों और अनचाही गर्भावस्था से जुड़े मामलों में महिलाओं के प्रजनन अधिकारों पर अनावश्यक बाधाएं नहीं लगा सकतीं, क्योंकि ऐसा करना उनके संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने जैसा होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि पीड़िता के परिजनों ने 9 मई को ही जांच अधिकारी को गर्भावस्था की जानकारी दे दी थी, लेकिन इसके बावजूद गर्भपात की प्रक्रिया को लेकर समय पर कोई कदम नहीं उठाया गया। मामले की परिस्थितियों और पीड़िता की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने गर्भपात की अनुमति को उचित ठहराया और संबंधित चिकित्सा अधिकारियों को कानून के प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। आशीष दुबे / 31 मई 2026