ब्रासीलिया (ईएमएस)। दुनिया में आज भी कुछ ऐसी जनजातियां मौजूद हैं जिनका जीवन जंगल, जानवरों और प्रकृति के साथ पूरी तरह जुड़ा हुआ है। ब्राजील के अमेजन जंगलों में रहने वाली ‘आवा जनजाति’ भी अपने अनोखे जीवन और जानवरों के प्रति मातृत्व भाव के कारण चर्चा में रहती है। इस जनजाति की महिलाएं अनाथ जंगली जानवरों के बच्चों को अपने बच्चों की तरह पालती हैं और उन्हें स्तनपान तक कराती हैं। अमेजन के घने जंगलों में रहने वाली आवा जनजाति, जिसे ‘गुआजा ट्राइब्स’ भी कहा जाता है, पूरी तरह जंगलों पर निर्भर जीवन जीती है। यह जनजाति खानाबदोश शिकारी समुदाय मानी जाती है। इनके जीवन की सबसे खास बात वन्यजीवों के साथ उनका गहरा भावनात्मक रिश्ता है। यहां की महिलाएं बंदर, गिलहरी, जंगली सूअर और दूसरे जानवरों के अनाथ बच्चों को अपने परिवार का हिस्सा बना लेती हैं। वे इन जानवरों की देखभाल उसी तरह करती हैं जैसे कोई मां अपने बच्चे की करती है। कई बार वे उन्हें अपना दूध पिलाकर बड़ा भी करती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार ये जानवर भी इंसानों के इस प्यार का जवाब बेहद खास तरीके से देते हैं। पालतू बने जानवर जंगलों में ऊंचे पेड़ों पर चढ़कर फल और औषधीय जड़ी-बूटियां नीचे लाकर आदिवासियों की मदद करते हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘सर्वाइवल इंटरनेशनल’ की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 500 साल पहले इस जनजाति की आबादी हजारों में थी, लेकिन अब दुनिया में इनके केवल करीब 500 लोग ही बचे हैं। इनमें से भी लगभग 100 लोगों का बाहरी दुनिया से आज तक कोई संपर्क नहीं हुआ है। जंगलों में अवैध कटाई, खनन और भू-माफियाओं के कब्जों के कारण इनके घर और जीवन दोनों खतरे में पड़ गए हैं। इंसान और जानवरों के बीच ऐसा तालमेल आधुनिक समाज के लिए किसी अजूबे से कम नहीं माना जाता। हालांकि इस जनजाति का अस्तित्व अब गंभीर खतरे में है। सुदामा/ईएमएस 02 जून 2026