वाशिंगटन (ईएमएस)। हमारी पृथ्वी इस साल एक ऐसे महा-संकट की चपेट में आने वाली है, जिसे सुपर अल नीनो का नाम दिया गया है। यह एक प्राकृतिक घटना है, लेकिन इसकी तीव्रता इतनी अधिक होने की आशंका है कि यह पिछले 150 सालों के सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है। मौसम वैज्ञानिकों की माने तो इस सुपर अल नीनो के कारण दुनिया के कई देशों में मौसम का मिजाज पूरी तरह से बिगड़ जाएगा, जिससे कहीं भयंकर बाढ़ आएगी तो कहीं जमीन पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस जाएगी। यह कुदरत का ऐसा रौद्र रूप होगा जो आम जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। मानव इतिहास में सुपर अल नीनो का सामना अब तक केवल चार बार किया गया है, लेकिन इस बार की घटना को इतिहास की पांचवीं और सबसे विनाशकारी घटना माना जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल आने वाला सुपर अल नीनो अपने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ सकता है और दर्ज इतिहास का सबसे ज्यादा ताकतवर व विनाशकारी साबित हो सकता है। जब भी प्रकृति इस तरह का भयावह रूप लेती है, तो वैश्विक जलवायु प्रणाली पर इसका गहरा असर पड़ता है, जिससे पूरी दुनिया का संतुलन हिल जाता है। इस प्राकृतिक घटना का सीधा संबंध प्रशांत महासागर से है। सामान्यतः, जब प्रशांत महासागर की सतह का पानी अपने औसत तापमान से थोड़ा अधिक गर्म हो जाता है, तो उसे अल नीनो कहा जाता है। लेकिन, जब समुद्र के पानी का यह तापमान सामान्य से बहुत ही ज्यादा और असामान्य रूप से बढ़ने लगता है, तो वह सुपर अल नीनो का रूप ले लेता है। समुद्र के गर्म होने की यह प्रक्रिया दुनिया भर में हवाओं के रुख को बदल देती है, जिससे वैश्विक स्तर पर मौसम का पूरा चक्र ही असंतुलित हो जाता है। इस सुपर अल नीनो का असर वैश्विक स्तर पर बेहद भयावह होगा। दुनिया के कुछ हिस्सों में मूसलाधार बारिश और शक्तिशाली चक्रवात आएंगे, जिससे भयानक बाढ़ की स्थिति बन सकती है और शहर के शहर पानी में डूब जाएंगे। वहीं, इसके ठीक विपरीत, कई इलाके भयंकर सूखे की चपेट में आ जाएंगे, जहां नदियां सूख जाएंगी, फसलें बर्बाद होंगी और पीने के पानी की भारी किल्लत हो जाएगी। इन सबके साथ, लोगों को रिकॉर्ड तोड़ जानलेवा गर्मी और हीटवेव का भी सामना करना पड़ेगा। आर्थिक मोर्चे पर भी इसका सीधा असर दिखेगा। सूखे और बाढ़ से खेती को भारी नुकसान पहुंचेगा, जिससे अनाज, सब्जियों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होगी। परिणामस्वरूप, बाजारों में महंगाई बढ़ेगी और आम आदमी के बजट पर भारी दबाव पड़ेगा। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस महा-संकट का असर कुछ क्षेत्रों में विशेष रूप से देखने को मिलेगा। भारत के संदर्भ में, सुपर अल नीनो दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर कर सकता है, जिससे देश के कई राज्यों में कम बारिश और भीषण हीटवेव का सामना करना पड़ेगा। प्रशांत महासागर के गर्म होने से पेरू, इक्वाडोर और चिली जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ेगा, जबकि ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया और फिलिपींस जैसे एशियाई देशों में मानसून कमजोर पड़ने से गंभीर सूखे की स्थिति उत्पन्न होगी। पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में भी अकाल और भुखमरी जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। सुदामा/ईएमएस 03 जून 2026