अंतर्राष्ट्रीय
03-Jun-2026


-प्रशासन का कहना- इमारत का निर्माण जापानी कानूनों का उल्लंघन कर किया गया टोक्यो,(ईएमएस)। जापान में सैतामा प्रांत के कावागोए शहर में बनाई गई एक मस्जिद अब कानूनी विवादों में घिर गई है। इस मस्जिद का उद्घाटन इसी साल अप्रैल में जापान में पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हमीद की मौजूदगी में हुआ था, लेकिन अब जापानी प्रशासन इस अवैध निर्माण को ढहाने की तैयारी कर रहा है। स्थानीय नगरपालिका और प्रशासनिक केंद्र ने इस मामले पर अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि इमारत का निर्माण जापानी कानूनों का उल्लंघन करके किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कावागोए सिटी हॉल जो शहर का नगरपालिका प्रशासनिक केंद्र है, उसने इस मस्जिद के बारे में अपना रुख साफ कर दिया है। सिटी हॉल के एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह इमारत एक शहरी विकास नियंत्रण क्षेत्र में बनाई गई थी, जहां आमतौर पर निर्माण की मनाही है, जब तक कि सिटी प्लानिंग एक्ट के तहत खास अनुमतियां न ले ली जाएं। सिटी हॉल के बयान के मुताबिक अधिकारियों को संबंधित पक्षों से मस्जिद को गिराने के अनुरोध भी मिले हैं, और इस प्रस्ताव को समीक्षा के लिए स्वीकार कर लिया गया है। जब यह पता चला कि मस्जिद अवैध रूप से बनाई गई थी, तो टोक्यो में पाकिस्तानी दूतावास खुद को एक अजीब स्थिति में पाया। पाकिस्तानी दूतावास ने पाकिस्तानी समुदाय के सदस्यों से आग्रह किया कि वे जापानी नियमों का पूरी तरह से पालन करें। रिपोर्ट के मुताबिक 1 जून को एक्स पर पोस्ट करते हुए पाकिस्तानी दूतावास ने कहा कि जापान में रहने वाले पाकिस्तानी समुदाय से दूतावास पूरी विनम्रता से अनुरोध करता है और इस बात पर ज़ोर देता है कि वे सभी मामलों में, विशेष रूप से पूजा स्थलों के निर्माण के संबंध में, जापानी कानूनों का पूरी तरह से पालन करें। स्थानीय सरकारों से जरूरी परमिट लिए बिना कोई भी निर्माण परियोजना शुरू नहीं करें। खास बात यह है कि दूतावास ने बताया कि राजदूत अब्दुल हमीद 3 अप्रैल को मस्जिद के उद्घाटन में इसलिए शामिल हुए थे, क्योंकि उन्हें बताया गया था कि जापानी कानून के तहत ज़रूरी सभी स्वीकृतियां प्राप्त कर ली गई हैं। इस बीच, कावागोए के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और आगे की कार्रवाई पर फैसला लेने से पहले संबंधित एजेंसियों के साथ तालमेल बिठा रहे हैं। शहर प्रशासन ने यह भी माना है कि चूंकि यह ढांचा बिना किसी आधिकारिक अनुमति के बनाया गया था, इसलिए वे इस बात की पुष्टि नहीं कर सकते कि निर्माण शुरू होने से पहले आस-पास के निवासियों को पर्याप्त स्पष्टीकरण दिया गया था या नहीं। इस जानकारी ने मस्जिद विवाद में एक और पहलू जोड़ दिया है। जापान में समुदाय से परामर्श को अक्सर विकास परियोजनाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, खासकर तब जब नए ढांचे स्थानीय इलाकों को प्रभावित कर सकते हों। फिलहाल शहर के अधिकारी मस्जिद के भविष्य पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। यह ढांचा अभी भी खड़ा है, लेकिन यह रहेगा या इसे ढहा दिया जाएगा, यह शहर परिषद के फैसले पर निर्भर करेगा। सिराज/ईएमएस 03जून26