अंतर्राष्ट्रीय
03-Jun-2026


बांग्लादेशी विशेषज्ञों ने रहमान सरकार को दी सलाह ढाका (ईएमएस)। भारत और बांग्लादेश के बीच अवैध प्रवासियों तथा सीमा प्रबंधन को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, इसकारण दोनों देशों के संबंधों में तनाव के संकेत मिल रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में, बांग्लादेशी विशेषज्ञों ने ढाका की नई सरकार को सलाह दी है कि वे इस संवेदनशील मुद्दे पर बेहद संतुलित और सावधानीपूर्ण कूटनीति अपनाए। उनका मानना है कि भारत के साथ किसी भी प्रकार का सीधा टकराव दोनों देशों के साझा दीर्घकालिक हितों के लिए हानिकारक होगा है। रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया को तेज किया गया है। राज्य सरकार ने सीमा सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और सीमा पर बाड़ लगाने के लिए भूमि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है, साथ ही संदिग्ध अवैध प्रवासियों के लिए होल्डिंग सेंटर भी स्थापित किए हैं। इसी दौरान, भारत-बांग्लादेश सीमा पर कथित पुशबैक विवाद गहरा गया है। बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) ने आरोप लगाया है कि भारत की ओर से कई लोगों को सीमा पार वापस भेजने की कोशिश की गई है, जिससे कुछ मामलों में दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच गतिरोध उत्पन्न हुआ और लोग नो-मैन्स लैंड में फंस गए। बांग्लादेश सरकार ने इसतरह के पुशबैक मामलों पर कड़ी आपत्ति जताकर कहा है कि किसी भी व्यक्ति की वापसी स्थापित कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रियाओं के तहत ही होनी चाहिए। बांग्लादेशी पत्रकार ने अपने लेख में इस बात पर जोर दिया है कि प्रवासन का मुद्दा दोनों देशों के संबंधों के लिए एक बड़ी संवेदनशील चुनौती बन सकता है। उन्होंने ढाका को सलाह दी है कि वह अपनी चिंताओं को मजबूती से उठाए, लेकिन साथ ही नई दिल्ली के साथ संवाद और सहयोग की नीति भी बनाए रखे। विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश व्यापार, जल बंटवारे (विशेषकर तीस्ता नदी समझौता), ट्रांजिट सुविधाओं और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर भारत के सहयोग का इच्छुक है। इसके बाद में, सीमा और प्रवासन के मुद्दे को खुली कूटनीतिक टकराव की दिशा में ले जाना बांग्लादेश के दीर्घकालिक हितों के लिए प्रतिकूल हो सकता है। इस गंभीर पृष्ठभूमि में, 8 से 11 जून के बीच नई दिल्ली में भारत की सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और बांग्लादेश की बीजीबी के महानिदेशक स्तर की होने वाली बैठक का विशेष महत्व है। इस बैठक में सीमा सुरक्षा, अवैध प्रवासन, सीमा पर बाड़ लगाने, तस्करी पर रोक और लोगों के हस्तांतरण की प्रक्रियाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की नई सरकार को भारत के साथ संबंधों में एक संतुलित और व्यावहारिक नीति अपनानी होगी। उनके अनुसार, वर्तमान परिस्थिति में निरंतर संवाद और सक्रिय सहयोग ही ऐसा मार्ग है जो दोनों पड़ोसी देशों को सीमा संबंधी जटिल चुनौतियों का स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान खोजने में मदद कर सकता है। आशीष दुबे / 03 जून 2026