अंतर्राष्ट्रीय
03-Jun-2026


ढाका,(ईएमएस)। भारत-बांग्लादेश सीमा पर कथित अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को लेकर एक असामान्य स्थिति देखने को मिली, जिसके बाद सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के बीच कई दौर की बातचीत हुई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम बंगाल के पेट्रापोल सीमा क्षेत्र में कुछ लोगों को लेकर दोनों देशों की सीमा सुरक्षा एजेंसियों के बीच गतिरोध की स्थिति बन गई। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी 24 परगना जिले के पेट्रापोल क्षेत्र स्थित जयंतिपुर बॉर्डर आउटपोस्ट के पास कुछ कथित बांग्लादेशी नागरिकों को सीमा के निकट नो-मैन्स लैंड क्षेत्र में देखा गया। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए गए। इसके बाद बांग्लादेश की सीमा सुरक्षा एजेंसी बीजीबी ने मामले पर आपत्ति जाहिर की और संबंधित व्यक्तियों की नागरिकता तथा पहचान के सत्यापन की मांग की। बताया गया कि इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों की सीमा सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के बीच फ्लैग मीटिंग आयोजित की गई। हालांकि प्रारंभिक बातचीत में कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकल सका और मामला कुछ समय तक लंबित रहा। बीजीबी अधिकारियों का कहना था कि किसी भी व्यक्ति को स्वीकार करने से पहले उसकी नागरिकता, पते और अन्य दस्तावेजों का उचित सत्यापन आवश्यक है। मामले के बाद सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ा दी गई। बीजीबी ने अपनी ओर निगरानी तेज कर दी, जबकि बीएसएफ ने भी सीमावर्ती इलाकों में गश्त और निगरानी बढ़ाई। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों पक्षों ने सीमा पर किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को रोकने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए हैं। यह घटनाक्रम तब आया है जब भारत और बांग्लादेश के बीच अवैध प्रवासन, सीमा प्रबंधन और नागरिकता सत्यापन जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को वापस भेजने या स्वीकार करने की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय नियमों और द्विपक्षीय प्रोटोकॉल के तहत ही पूरी की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा से जुड़े इसतरह के मामलों में दोनों देशों के बीच समन्वय और सत्यापन प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। फिलहाल संबंधित व्यक्तियों की पहचान और नागरिकता की पुष्टि को लेकर जांच और आधिकारिक प्रक्रिया जारी है, जबकि दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। आशीष दुबे / 03 जून 2026