-2025 के मुकाबले दोगुनी रफ्तार से भाग रहे विदेशी निवेशक मुंबई(ईएमएस)। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 2026 में अब तक 96 ट्रेडिंग सेशंस में भारत के सेकेंडरी मार्केट्स में हर ट्रेडिंग घंटे 400 करोड़ रुपए से ज़्यादा की रफ्तार से शेयर बेचे हैं। यह 2025 के पूरे कैलेंडर वर्ष के दौरान 241 ट्रेडिंग सेशंस में दर्ज 161 करोड़ रुपए प्रति घंटे की रफ्तार से दोगुने से भी ज्यादा है। कुल मिलाकर, विदेशी निवेशकों ने 2026 में अब तक सेकेंडरी बाजारों में 2.54 लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा के शेयर बेचे हैं। यह 2025 के पूरे साल में बेचे गए लगभग 2.4 लाख करोड़ रुपए के शेयरों से पहले ही ज्यादा है, जबकि इस साल के अभी सात महीने बाकी हैं। एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, मार्च से बिकवाली में तेजी आई, जब विदेशी निवेशकों ने लगभग 1.27 लाख करोड़ रुपए के शेयर बेचे। इसके बाद अप्रैल में लगभग 50,800 करोड़ रुपए और मई में लगभग 54,000 करोड़ रुपए के शेयर बेचे गए। बिकवाली का यह ताजा दौर अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद बढ़ते जियो पॉलिटिकल टेंशन के कारण शुरू हुआ है। इस तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया है और महंगाई तथा व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का भारत की कमाई के अनुमान पर बुरा असर पड़ सकता है, क्योंकि देश ऊर्जा आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है। ग्लोबल फंड भी अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया में एआई से जुड़े शेयरों की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं, जबकि एआई के क्षेत्र में भारत की सीमित मौजूदगी के कारण निवेशकों की दिलचस्पी कम हुई है। एमएससीआई इंडेक्स में भारत का वेटेज कम होने से विदेशी निवेश पर दबाव और बढ़ गया है। अब तक कितना निकाल चुके हैं पैसा 2025 में, विदेशी निवेशकों की बिकवाली मुख्य रूप से शेयरों के हाई वैल्यूएशन, कमाई में धीमी वृद्धि और वैश्विक व्यापार से जुड़ी चिंताओं के कारण हुई थी। विश्लेषकों का कहना है कि बिकवाली का मौजूदा दौर करेंसी की गिरावट और भारतीय बाजारों से मिलने वाले रिटर्न की उम्मीदें कम होने के कारण और भी ज्यादा आक्रामक हो गया है। सेकेंडरी बाजारों में भारी बिकवाली के बावजूद, विदेशी निवेशकों ने 2026 में अब तक प्राइमरी बाजारों में 15,473 करोड़ रुपए का निवेश किया है। हालांकि, पूंजी जुटाने की गतिविधियां धीमी रहीं, क्योंकि कई कंपनियों ने बाजार की कमजोर स्थितियों के कारण अपने आईपीओ लॉन्च करने में देरी की। इसकी तुलना में, विदेशी निवेशकों ने 2025 के पूरे साल के दौरान प्राइमरी मार्केट में 73,914 करोड़ रुपए का निवेश किया था। 2023 में, विदेशी निवेशकों ने सेकेंडरी मार्केट में 1.29 लाख करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जबकि इसी साल प्राइमरी मार्केट में 1.21 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया। आगे भी जारी रह सकती है चुनौती रुपए में तेजी से आई गिरावट ने विदेशी निवेशकों के रिटर्न को और नुकसान पहुंचाया है, जिससे फंड्स दूसरे मार्केट की ओर रुख कर रहे हैं। कैपिटल गेन्स टैक्स में नरमी और कॉर्पोरेट कमाई में सुधार से भारतीय इक्विटीज में विदेशी निवेश को वापस लाने में मदद मिल सकती है, लेकिन उन्होंने आगाह किया कि बढ़ती एनर्जी की कीमतों के कारण होने वाली महंगाई के असर से अगले कुछ क्वार्टर चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं। एनालिस्टों ने चेतावनी दी कि विदेशी बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है, क्योंकि 11 नई लिस्टेड न्यू-एज कंपनियों के लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपए के शेयर, प्री-लिस्टिंग लॉक-इन पीरियड खत्म होने के बाद, मई से अगस्त के बीच ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो जाएंगे। विनोद उपाध्याय / 03 जून, 2026