ज़रा हटके
04-Jun-2026
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विएंतियाने (ईएमएस)। वैज्ञानिकों की ताजा खोज ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देश लाओस में सदियों पुराने अंतिम संस्कार और मृत्यु से जुड़े रीति-रिवाजों पर नया प्रकाश डाला है। शोधकर्ताओं को उत्तरी लाओस के जियांग खौआंग पठार पर स्थित साइट 75 की खुदाई में एक विशाल पत्थर का मटका मिला है, जिसे अब डेथ जार यानी मौत की मटकी कहा जा रहा है। इस पत्थर के पात्र के भीतर से करीब 37 इंसानी कंकालों के अवशेष और कई प्राचीन वस्तुएं मिली हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मटका सिर्फ सजावट या भंडारण के लिए नहीं था, बल्कि मृतकों की हड्डियों को सामूहिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता था, जो उस दौर की एक अनूठी परंपरा को दर्शाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस मटके में मिले इंसानी अवशेष किसी युद्ध या एक साथ हुई मौत का परिणाम नहीं हैं। हड्डियां बिना किसी क्रम के एक-दूसरे के ऊपर भरी हुई मिलीं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि अलग-अलग समय में मृत लोगों की हड्डियां यहां जमा की जाती थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि उस दौर में शवों को पहले किसी दूसरी जगह सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता था। जब शरीर का मांस पूरी तरह खत्म हो जाता था, तब परिवार के सदस्य हड्डियों को इकट्ठा कर इन विशाल पत्थर के बर्तनों में रख देते थे। वैज्ञानिक जांच में पता चला है कि इस मृत्यु कलश का उपयोग लगभग सन् 890 से सन् 1160 के बीच किया गया। यानी यह मटका करीब 270 वर्षों तक लगातार इस्तेमाल में रहा, जो इस स्थान के धार्मिक और सामाजिक महत्व को दर्शाता है। खुदाई के दौरान केवल मानव कंकाल ही नहीं मिले, बल्कि उस समय के जीवन और परंपराओं से जुड़े कई अहम अवशेष भी सामने आए। इनमें लोहे के औजार, मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े और तांबे से बनी एक प्राचीन घंटी शामिल हैं, जो उस समाज की कारीगरी और जीवनशैली पर प्रकाश डालते हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात कुछ कंकालों के दांतों से जुड़ी रही। शोधकर्ताओं ने पाया कि कई कंकालों के दांत जानबूझकर तोड़े गए थे या निकाले गए थे। इससे संकेत मिलता है कि उस समय मृत्यु से जुड़ा कोई विशेष धार्मिक या सामाजिक अनुष्ठान प्रचलित था, जिसकी वजह से ऐसा किया जाता था। पुरातत्वविदों का मानना है कि यह समाज अपने पूर्वजों के प्रति बेहद सम्मानजनक और संगठित था। लोग समय-समय पर इन स्थलों पर लौटते थे, हड्डियों को साफ करते थे और कई पीढ़ियों तक मृतकों की स्मृति से जुड़े अनुष्ठान निभाते थे। इस खोज में रंग-बिरंगे कांच के दुर्लभ मनके भी मिले हैं, जिन्होंने इतिहासकारों को नया सुराग दिया है। जांच से पता चला कि ये मनके स्थानीय नहीं थे, बल्कि दक्षिण एशिया और मिडिल ईस्ट से लाए गए थे। इससे यह साबित होता है कि करीब 1,200 साल पहले भी लाओस का यह दूरदराज इलाका अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों से जुड़ा हुआ था और उसका व्यापक सांस्कृतिक संपर्क था। यह खोज लाओस के प्रसिद्ध और रहस्यमयी प्लेन ऑफ जार्स का हिस्सा है, जहां 120 से अधिक स्थानों पर सैकड़ों विशाल पत्थर के मटके फैले हुए हैं। इन रहस्यमयी बर्तनों ने पिछले कई दशकों से वैज्ञानिकों और इतिहासकारों को उलझा रखा है। सुदामा/ईएमएस 04 जून 2026