क्षेत्रीय
04-Jun-2026


मंडला (ईएमएस)। खिरिखिरी ग्राम पंचायत में इस्टीमेट को ताक पर रखकर हो रहा निर्माण, कुंभकर्णी नींद में सो रहे जिम्मेदार अधिकारी शासन की योजनाओं और जनता के टैक्स के पैसों की धज्जियां कैसे उड़ाई जाती हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण मंडला जिले की ग्राम पंचायत खिरिखिरी में देखने को मिल रहा है। यहां ग्रामीणों की सुविधा और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए स्वीकृत किया गया घाट निर्माण कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। ठेकेदार द्वारा सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ाकर घटिया निर्माण किया जा रहा है, लेकिन मजाल है कि किसी जिम्मेदार अधिकारी की नजर इस पर पड़ी हो। लाखों का बजट, कौड़ियों का काम ग्रामीणों को पानी की सहूलियत देने और जल स्रोतों को साफ-सुथरा रखने के उद्देश्य से शासन द्वारा यहां 12 लाख की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई थी। इतने बड़े बजट से एक मजबूत और सुसज्जित घाट का निर्माण होना था, लेकिन मौके पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ठेकेदार द्वारा निर्माण में अत्यंत घटिया स्तर की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे घाट बनने के साथ ही ढहने की कगार पर पहुंच गया है। ग्रामीणों का फूटा गुस्सा यह हमारे गांव के साथ धोखा है। सरकारी इस्टीमेट (मापदंड) को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। सीमेंट और रेत का अनुपात ऐसा है कि हाथ लगाने से ही प्लास्टर उखड़ रहा है। अगर जांच नहीं हुई तो यह घाट पहली बारिश भी नहीं झेल पाएगा। अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी पर उठे सवाल इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली है। शासकीय इस्टीमेट के विरुद्ध सरेआम हो रहे इस घटिया निर्माण को लेकर अब तक किसी भी तकनीकी अधिकारी या जांच टीम ने मौके का मुआयना नहीं किया है। जनता के मन में अब यह बड़ा सवाल कौंध रहा है आखिर किसके संरक्षण में ठेकेदार इतनी बेखौफ तरीके से शासकीय पैसों की धज्जियां उड़ा रहा है? क्या उप-यंत्री (Sub-Engineer) और जनपद के आला अधिकारियों को इस भ्रष्टाचार की भनक नहीं है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं? कब तक उड़ेगी जनता की गाढ़ी कमाई की धज्जियां? विकास के नाम पर कागजों पर बड़ी-बड़ी बातें करने वाला प्रशासन धरातल पर पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है। खिरिखिरी के ग्रामीणों ने अब इस मामले में जिला कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक इस निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे। अब देखना यह होगा कि इस धमाकेदार खुलासे के बाद मंडला का जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागता है या फिर ठेकेदार को क्लीन चिट देकर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है। ईएमएस/मोहने/ 04 जून 2026