व्यापार
08-Jun-2026


- 81 फीसदी भारतीय रील्स से पाते हैं नए प्रोडक्ट्स की जानकारी मुंबई (ईएमएस)। भारत में शॉर्ट वीडियो कंटेंट, खासकर इंस्टाग्राम रील्स अब सिर्फ टाइमपास का जरिया नहीं रहा। सोशल मीडिया दिग्गज मेटा और रिसर्च एजेंसी इप्सॉस की एक नई ज्वॉइंट स्टडी ने खुलासा किया है कि रील्स लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और शॉपिंग के तरीकों को गहराई से प्रभावित कर रही हैं। यह बदलता ट्रेंड शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों के उपभोक्ताओं पर समान रूप से दिख रहा है। मेटा और इप्सॉस द्वारा देश के 23 शहरों और ग्रामीण इलाकों के 4,000 से अधिक लोगों पर किए गए इस अध्ययन के मुताबिक, रील्स अब सीधे तौर पर भारतीय उपभोक्ताओं की जेब और ई-कॉमर्स को प्रभावित कर रही हैं। रिपोर्ट बताती है कि 81 फीसदी लोग किसी भी नए प्रोडक्ट या ब्रांड की पहली जानकारी रील्स के जरिए ही हासिल करते हैं। इतना ही नहीं, 66 फीसदी लोग खरीदारी से पहले रील्स पर प्रोडक्ट का रिव्यू या कंटेंट चेक करते हैं, और चौंकाने वाली बात यह है कि 47 फीसदी लोग रील देखने के बाद ही उस सामान को खरीदने का अंतिम फैसला लेते हैं। यह डिजिटल क्रांति खासकर युवा पीढ़ी पर सबसे ज्यादा असर डाल रही है, जहां 89% जेन-जी यूजर्स हर दिन रील्स देखते हैं और इनमें से 84 फीसदी रील्स के माध्यम से नए प्रोडक्ट्स की खोज करते हैं। ग्रामीण इलाकों में भी यह क्रेज बढ़ रहा है; जहां 94 फीसदी लोग रोजाना वीडियो देखते हैं और 73 फीसदी ग्रामीण यूजर्स ने रील्स के जरिए नए ब्रांड्स के बारे में जाना है। सिर्फ फैशन या ब्यूटी ही नहीं, ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी रील्स का प्रभाव है। 82 फीसदी लोग नई कारों और बाइक्स को खोजने के लिए मेटा प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करते हैं, और रील्स का असर खरीदारी के अंतिम फैसले में 50 फीसदी तक देखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 तक भारतीय यूजर्स इंस्टाग्राम रील्स पर ब्यूटी, मेकअप और फैशन से जुड़ा कंटेंट सबसे ज्यादा देखना पसंद करेंगे। क्रिएटर्स के लिए भी अच्छी खबर है, क्योंकि इंस्टाग्राम रील्स अन्य शॉर्ट वीडियो ऐप्स के मुकाबले 60 फीसदी ज्यादा एंगेजमेंट प्रदान करता है। मेटा इंडिया का कहना है कि अब ब्रांड्स के लिए कंटेंट और व्यापार को एक साथ जोड़कर चलना बेहद जरूरी हो गया है। सतीश मोरे/08जून ---