व्यापार
14-Jun-2026
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- विश्लेषकों की निगाहें महंगाई आंकड़ों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की घोषणा और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर मुंबई (ईएमएस)। भारतीय शेयर बाजार की दिशा इस सप्ताह मुख्य रूप से वैश्विक संकेतों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी निर्णय और कच्चे तेल की कीमतों के रुख से निर्धारित होगी। विश्लेषकों का कहना है कि मई के महंगाई आंकड़े और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित समझौते जैसे भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बाजार की धारणा को प्रभावित करेंगे। स्थानीय शेयर बाजार के लिए यह सप्ताह कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से भरा रहने वाला है, जिनकी बदौलत बाजार की दिशा तय होगी। विश्लेषकों ने राय जताई है कि घरेलू स्तर पर मई माह के थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े महत्वपूर्ण रहेंगे। वैश्विक स्तर पर 16-17 जून को होने वाली अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक और उसके निर्णय पर निवेशकों की करीबी नजर रहेगी। बाजार भागीदार फेडरल रिजर्व की टिप्पणियां, महंगाई के दृष्टिकोण, आर्थिक वृद्धि के अनुमान और भविष्य में ब्याज दरों में कटौती के संकेतों का विश्लेषण करेंगे। इसके अतिरिक्त अमेरिका और ईरान के बीच रविवार को संभावित शांति समझौता बाजार के लिए एक अहम भू-राजनीतिक घटनाक्रम होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते पर हस्ताक्षर और रणनीतिक महत्व वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी के लिए तुरंत खोलने की बात कही है, हालांकि असफल होने पर नए हमलों की संभावना का संकेत भी दिया है। इस समझौते की उम्मीदों से ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में पहले ही गिरावट आई है, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए एक अत्यंत सकारात्मक संकेत है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करेंगी। जून के पहले पखवाड़े में एफपीआई भारतीय शेयरों से 62,853 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी कर चुके हैं। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के अनुसार 2026 में अब तक एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से कुल 2.87 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं, जो पूरे 2025 में निकाले गए 1.66 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक है। घरेलू मोर्चे पर मानसून की प्रगति भी निवेशकों की निगाहों में रहेगी। सतीश मोरे/14जून ---