14-Jun-2026
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-यह पर्व ओडिशा में मनाया जाने वाला तीन दिवसीय नारीत्व का त्योहार है नई दिल्ली,(ईएमएस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ओडिशा में मनाए जाने त्योहार राजा पर राज्य के लोगों को बधाई दी है। राष्ट्रपति ने एक्स पर लिखा- फसल के त्योहार राजा के मौके पर मैं देश के लोगों और खासकर ओडिशा के लोगों को दिल से बधाई देती हूं। राष्ट्रपति मुर्मु ने लिखा-मानसून के मौसम का यह मनभावन त्योहार धरती, मां और बादलों के सम्मान में मनाया जाता है। पीठा, पान के पत्ते और झूला झूलने जैसे उत्सवों के बीच राजा हमें प्रकृति के साथ मिल-जुलकर रहने की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि राजा त्योहार की यह खास भावना हमें राष्ट्र निर्माण के लिए खुद को समर्पित करने के लिए प्रेरित करेगी। राजा के इस उत्सवपूर्ण मौके पर मैं राज्य और देश के लोगों की खुशी, शांति और समृद्धि की कामना करती हूं। बता दें राजा पर्व ओडिशा में मनाया जाने वाला तीन दिवसीय नारीत्व का त्योहार है। माना जाता है कि हिंदू देवी भूमि जो देवी महालक्ष्मी का धरती माता वाला रूप हैं और भगवान विष्णु की पत्नी हैं, इस त्योहार के पहले तीन दिनों के दौरान मासिक धर्म से गुजरती हैं। चौथे दिन को वसुमती स्नान या भूमि का औपचारिक स्नान कहा जाता है। राजा शब्द संस्कृत के रजस शब्द से आया है, जिसका अर्थ है मासिक धर्म और मासिक धर्म वाली महिला को रजस्वला कहा जाता है। मध्यकाल में यह त्योहार खेतीबाड़ी से जुड़े त्योहार के तौर पर लोकप्रिय हुआ, जिसमें भूमि की पूजा की जाती है। देवी भूमि को भगवान विष्णु के ही एक क्षेत्रीय रूप जगन्नाथ की पत्नी के तौर पर पूजा जाता है। पुरी मंदिर में जगन्नाथ के बगल में भूमि देवी की चांदी की मूर्ति भी मौजूद है। यह त्योहार जून के बीच में आता है। पहले दिन को पहिली राजा, दूसरे दिन को मिथुन संक्रांति और तीसरे दिन को भुदाहा या बासी राजा कहा जाता है। जानकारी के मुताबिक चौथे दिन को बसुमती स्नान कहते हैं, जिसमें महिलाएं धरती के प्रतीक के तौर पर सिल-बट्टे को हल्दी का लेप लगाकर नहलाती हैं और फूल, सिंदूर वगैरह से उसकी पूजा करती हैं। धरती माता को हर तरह के मौसमी फल चढ़ाए जाते हैं। पहले दिन से ठीक पहले वाले दिन को सजाबजा या तैयारी का दिन कहा जाता है। इस दिन घर और रसोई की सफाई की जाती है और तीन दिनों के लिए मसाले पीसे जाते हैं। इन तीन दिनों में महिलाएं और लड़कियां काम से आराम करती हैं और नई साड़ी व गहने पहनने के साथ ही आलता लगाती हैं। यह त्योहार अंबुवाची मेले जैसा ही है। ओडिशा के कई त्योहारों में सबसे मशहूर राजा तीन दिनों तक मनाया जाता है। सिराज/ईएमएस 14जून26