राज्य
14-Jun-2026
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भोपाल(ईएमएस)। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में नृत्य,गायन एवं वादन पर केंद्रित गतिविधि संभावना का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 14 जून, 2026 को दयाराम राठुरिया एवं साथी, डिण्डोरी द्वारा बैगा जनजातीय करमा नृत्य और हरिसिंह केवट एवं साथी, सिरोंज द्वारा कछियाई नृत्य की प्रस्तुति दी गई। कछियाई नृत्य कछियाई नृत्य बुंदेलखंड का पारंपरिक लोकनृत्य और संगीत शैली है। यह मुख्य रूप से काछी समुदाय द्वारा मांगलिक अवसरों और त्योहारों पर किया जाता है, जिसमें भक्ति और श्रृंगार रस की प्रधानता होती है। यह मूलतः पुरुष-प्रधान गायन शैली है, लेकिन विवाह या अन्य मांगलिक अवसरों पर घर की महिलाएँ भी हिस्सा लेती हैं। इसके मुख्य वाद्ययंत्र ढोलक, सारंगी और खंजरी होते हैं। गीतों में देवी-देवताओं की स्तुति (विशेषकर शिव-पार्वती) और आम जनजीवन से जुड़े प्रसंग शामिल होते हैं। बैगा जनजातीय करमा नृत्य करमा नृत्य बैगा जनजाति का प्रमुख लोक नृत्य है। इस नृत्य में बैगा अपने कर्म को नृत्य-गीत के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं। इसी कारण इस नृत्य-गीत को करमा कहा जाता है। करमा नृत्य विजयदशमी से वर्षा के प्रारंभ होने तक चलता है। नृत्य में बैगा पुरुष बीच में खड़े होकर वाद्ययंत्र बजाते हैं और महिलाएं गोल घेरे बनाकर एक दूसरे के घूम-घूम कर गीत गाते हुए नृत्य करती हैं एवं हाथ में ठिसकी (वाद्ययंत्र) होता है। इस नृत्य में स्त्री एवं पुरुष दोनों समूह में भाग लेते है। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय़ में हर रविवार को दोपहर 02 बजे से आयोजित होने वाली इस गतिविधि में मध्यप्रदेश के पांच लोकांचलों एवं सात प्रमुख जनजातियों की बहुविध कला परंपराओं की प्रस्तुति के साथ ही देश के अन्य राज्यों के कलारूपों को देखने समझने का अवसर भी जनसामान्य को प्राप्त होगा। हरि प्रसाद पाल /14 जून, 2026