राज्य
14-Jun-2026
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:: विवाह केवल गृहस्थी नहीं, सनातन समाज की बुनियाद को मजबूती देने वाला श्रेष्ठ संस्कार : आचार्य मनीष भाई इंदौर (ईएमएस)। एबी रोड (चिड़ियाघर के सामने) स्थित माहेश्वरी मांगलिक भवन पर जारी श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ में रविवार को श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग धूमधाम से मनाया गया। जैसे ही भगवान कृष्ण ने रुक्मणी के गले में वरमाला डाली, समूचा पांड़ाल हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की के जयघोष से गूंज उठा। ब्रज से आए संगीतज्ञों के बधाई गीतों पर महिला श्रद्धालु जमकर थिरकीं। वर-वधू पक्ष की ओर से निभाई गई विवाह की रस्मों ने उत्सव को जीवंत कर दिया। कथा के प्रारंभ में आयोजन समिति के राजेंद्र प्रसाद केडिया, अरविंद बागड़ी, राधेश्याम अग्रवाल, सुनील केडिया, प्रवीण कुमार केडिया व मनीष अग्रवाल सहित प्रबुद्धजनों ने व्यास पीठ का पूजन-आरती की। :: पश्चिमी देशों में बिखर रहे नैतिक मूल्य :: कथा व्यास श्रीधाम वृंदावन के आचार्य मनीष भाई ने मर्यादित जीवन का संदेश देते हुए कहा कि भगवान तन का नहीं, भक्त के मन का सौंदर्य देखते हैं। भारतीय संस्कृति में विवाह सात जन्मों का पवित्र बंधन है, जबकि पश्चिमी देशों में यह सात दिन भी नहीं टिक पाता। इसी कारण वहां सामाजिक और नैतिक मूल्य बिखर रहे हैं। हमारी सनातन व्यवस्था के कारण ही भारतीय समाज आज भी चरित्रवान और संगठित है। :: अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु :: आचार्य ने चेतावनी देते हुए कहा कि अहंकार मनुष्य का ऐसा गुप्त शत्रु है, जो किसी भी रूप में प्रवेश कर व्यक्ति का पतन कर देता है। भगवान को सर्वाधिक अरुचि अहंकार से ही है। हमारी संयुक्त परिवार की परंपरा और सनातन संस्कृति का ही गौरव है कि आज विदेशी जोड़े भी पाश्चात्य संस्कृति छोड़ भारत में सनातन पद्धति से विवाह रचा रहे हैं। प्रकाश/14 जून 2026