ज़रा हटके
15-Jun-2026
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लंदन (ईएमएस)। हाल ही में वैज्ञानिकों ने 415 मिलियन साल पुराने एक जीवाश्म की खोज की है। इस खोज ने पेलियोन्टोलॉजी के एक सदी पुराने रहस्य को सुलझा दिया है और यह भी बताया है कि आर्थ्रोपोड्स ने इतने विशाल आकार में कैसे विकसित हुए। इस दानवाकार जीव का नाम प्रिएक्टुरस गिगास है, और यह उस समय पृथ्वी पर मौजूद था जब अन्य जीव बहुत छोटे हुआ करते थे। इसकी लंबाई लगभग 3.3 फीट यानी करीब एक मीटर थी, और इसके डंक 6.2 इंच लंबे व बेहद खतरनाक थे। यह बिच्छू जमीन के साथ-साथ पानी में भी अपना शिकार खोजता था, जिससे इसकी शिकार करने की क्षमता और भी बढ़ जाती थी। प्रिएक्टुरस गिगास के अवशेष पहली बार 1870 के दशक में इंग्लैंड और वेल्स में मिले थे। लेकिन पेलियोन्टोलॉजिस्ट्स लंबे समय तक इस जीव की वास्तविक पहचान को लेकर असमंजस में थे। मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के पेलियोन्टोलॉजिस्ट रसेल गारवुड ने बताया, प्रिएक्टुरस ने एक सदी से भी अधिक समय तक हम पेलियोन्टोलॉजिस्ट्स को हैरान किया है। शुरुआत में शोधकर्ताओं को लगा कि यह एक बड़ा क्रस्टेशियन है। फिर 1980 के दशक में कुछ शोधों ने इसे बिच्छू बताया। लेकिन जीवाश्म के टुकड़े बहुत छोटे थे और बिच्छू की विशिष्ट पूंछ भी गायब थी, जिससे उस समय इस सिद्धांत को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया गया। नई स्टडी ने इस पुरानी बहस को आखिरकार खत्म कर दिया है। लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम के शोधकर्ताओं ने आधुनिक इमेजिंग और एनालिसिस तकनीकों का उपयोग किया। उन्होंने प्रिएक्टुरस गिगास के खास जीवाश्मों की दोबारा जांच की और उनकी तुलना पहले से मौजूद प्रागैतिहासिक जीवों और पहचाने गए बिच्छुओं के जीवाश्मों से की। इस गहन विश्लेषण से यह साफ हो गया कि प्रिएक्टुरस गिगास वास्तव में एक बिच्छू ही है। नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम के रिचर्ड हॉवर्ड ने बताया, यह पुष्टि करना कि यह जीव एक बिच्छू है, हमारी समझ को पूरी तरह से बदल देता है। यह विशाल बिच्छू उस समय पृथ्वी पर था जब जंगलों जैसे जटिल इकोसिस्टम का विकास नहीं हुआ था। इसलिए वैज्ञानिकों का मानना है कि यह जीव आंशिक रूप से पानी में रहता होगा। जीवाश्म में एपिमेरा नामक फ्लैप जैसे स्ट्रक्चर मिले हैं, जो लॉबस्टर और केकड़ों के ऊपरी कवच की तरह काम करते थे। रिचर्ड हॉवर्ड ने कहा, जमीन पर प्रिएक्टुरस को सपोर्ट करने वाले जटिल इकोसिस्टम के बिना, इन जानवरों ने शायद अपनी जिंदगी का कुछ हिस्सा पानी में शिकार करते हुए बिताया होगा। पानी में रहने की वजह से ही इसे अपने विशाल शरीर को संभालने में मदद मिली होगी और इसने दोनों ही वातावरण में अपनी बादशाहत कायम रखी। 415 मिलियन साल पहले पृथ्वी पर मौजूद अन्य आर्थ्रोपोड्स, जैसे कीड़े और मकड़ियां, बहुत छोटे हुआ करते थे। ऐसे में यह बिच्छू अपने समय का सबसे बड़ा और खतरनाक शिकारी बन गया। इसकी एक बड़ी वजह यह भी थी कि इसे टक्कर देने वाला कोई दूसरा बड़ा शिकारी मौजूद नहीं था। पानी और जमीन दोनों जगह इसकी बादशाहत थी, जिससे यह अपने शिकार पर पूरी तरह हावी रहता था। रसेल गारवुड ने बताया, प्रिएक्टुरस को जो चीज इतनी दिलचस्प बनाती है, वह यह है कि यह उस समय विशाल हो गया जब जमीन पर जीवन बहुत छोटा था। सुदामा/ईएमएस 15 जून 2026